बदायूं। जिले में हृदय रोगियों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। इसके उलट उपचार की बेहतर व्यवस्था नहीं है। आलम यह है कि जिला अस्पताल में स्थायी रूप से ह्रदय रोग विशेषज्ञ का पद ही स्वीकृत नहीं है।
मेडिकल कॉलेज में पद स्वीकृत है पर वहां डॉक्टर की तैनाती नहीं है। जिला अस्पताल में मरीज बढ़ने पर वैकल्पिक व्यवस्था के तहत करीब चार साल पहले संविदा पर डॉक्टर की नियुक्ति की गई। कुछ दिन तक दिल के मरीजों को इलाज मिला, लेकिन वह कुछ ही दिनों में वह नौकरी छोड़कर नोएडा चले गए। तब से हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। हृदय रोगी बरेली, सैफई, अलीगढ़, मेरठ या फिर निजी चिकित्सकों के पास जाने को मजबूर हैं। वहीं, समय पर इलाज न मिलने पर कई बार हार्टअटैक से मरीज की जान तक चली जाती है।
जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में 24 घंटे के भीतर दस से अधिक मरीज ऐसे आते हैं जिन्हें दूसरे केंद्रों के लिए रेफर करना पड़ता है। यह स्थिति तब है जब मेडिकल कॉलेज में ह्रदय रोग विशेषज्ञ का पद स्वीकृत है। यहां एमबीबीएस के और बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई हो रही है। इसके बाद भी यहां दिल का डॉक्टर नहीं है।
जानकार बताते हैं कि मेडिकल कॉलेज में अभी केवल एमबीबीएस की पढ़ाई होती है। यहां कोई एमडी नहीं है। जिन कॉलेजों में एमडी से आगे डीएम होता है, वहां ह्रदय रोग विशेषज्ञ मरीजों का इलाज करने के साथ विद्यार्थियों को भी पढ़ाते भी हैं। जानकारों की मानें तो प्रदेश के जिला अस्पतालों के लिए मात्र दो ही ह्रदय रोग विशेषज्ञ हैं। इनमें एक अलीगढ़ और दूसरे बिजनौर में हैं। जिले में मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री आदि के आगमन पर अलीगढ़ से ह्रदय रोग विशेषज्ञ को यहां बुलाया जाता है।
ईको और टीएमटी के लिए भागना पड़ता है दूसरे शहर
बदलती जीवनशैली के चलते युवा भी दिल से जुड़ी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। ऐसे में यदि ईसीजी में बीमारी निकलकर नहीं आती है तो लक्षणों के आधार पर डॉक्टर मरीज को ईको और फिर टीएमटी की सलाह देते हैं, लेकिन दोनों ही सुविधाएं यहां नहीं हैं। हालांकि कुछ प्राइवेट डॉक्टरों के यहां यह मौजूद हैं, लेकिन आपात स्थिति को देखते हुए लोग बरेली या फिर आगरा, लखनऊ, दिल्ली को प्राथमिकता देते हैं।
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सीने में दर्द हुआ तो 25 मई को जिला अस्पताल करीब 1.20 बजे पहुंचे। इमरजेंसी में दिखाया तो वहां तैनात कर्मचारियों और डॉक्टर ने बताया कि यहां दिल से जुड़ी बीमारियों का इलाज नहीं होता। ईसीजी कराने के बाद बिना दवा के ही घर लौटना पड़ा। -गुड्डू, मीरा सराय
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गांव के ही राजू के सीने में दर्द होने पर शनिवार सुबह नौ बजे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टर न होने पर इलाज नहीं मिला। हारकर उसको बरेली ले जाना पड़ा है। - कुलदीप शर्मा, वजीरगंज
जिला अस्पताल में कॉर्डियोलॉजिस्ट का पद ही नहीं है। मरीजों की सुविधा के लिए अगर संविदा पर ही कॉर्डियोलॉजिस्ट की तैनाती हो जाए तो समस्या का समाधान हो सकता है। अभी दिल के मरीजों को केवल ईसीजी की ही सुविधा देकर रेफर किया जाता है।- डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस जिला अस्पताल
गुड्डू , मीरा सराय
गुड्डू , मीरा सराय