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Budaun News: छह राजकीय विद्यालयों में पुस्तकालय हैं फिर भी किताबें अलमारियों में कैद

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सहसवान में निर्माणाधीन पुस्तालय। संवाद
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बदायूं। जिले के छह राजकीय विद्यालयों में लाइब्रेरी है पर लाइब्रेरियन तैनात नहीं हैं। आमतौर पर किताबें अलमारियों में कैद रहती हैं। विद्यालय के ही किसी शिक्षक को अतिरिक्त कार्यभार देकर लाइब्रेरी का काम चलाऊ संचालन हो रहा है।
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शहर के राजकीय कन्या इंटर कॉलेज, राजकीय इंटर कॉलेज में लाइब्रेरी तो है, लेकिन पुस्तकालय अध्यक्ष नियुक्त नहीं किया गया है। ऐसे में शिक्षकों को अतिरिक्त प्रभार देकर काम चलाया जा रहा है। कादरचौक क्षेत्र में राजकीय इंटर निजामपुर, राजकीय कन्या इंटर काॅलेज चौडेरा, पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर काॅलेज चौड़ेरा, राजकीय इंटर कॉलेज बोंदरी स्थित है। इनमें भी लाइब्रेरियन नहीं हैं। छह विद्यालयों में एक हजार से अधिक विद्यार्थी हैं। किताबों की जरूरत सबको है, लेकिन पढ़ने-पढ़ाने का माहौल तो तभी बनेगा जब लाइब्रेरी संचालित हो।

कुर्सी-मेज से लेकर पुस्तकालय अध्यक्ष तक नहीं
कादरचौक। चौड़ेरा के पं. दीनदयाल उपाध्याय इंटर काॅलेज के प्रधानाचार्य केसी यादव ने बताया कि उनके विद्यालय की लाइब्रेरी के लिए के लिए कुछ किताबें मिली हैं, लेकिन पुस्तकालय अध्यक्ष से लेकर बैठने के लिए कुर्सी मेज तक नहीं है। संवाद
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अब तक नहीं बना पुस्तकालय
सैदपुर। राजकीय कन्या इंटर कॉलेज में 10 साल पहले बनाया गया था। यहां पर छह से 12 तक में करीब सवा सौ छात्राएं पंजीकृत हैं। इनको पढ़ाने के लिए महज चार शिक्षकों का स्टाफ है। यहां पर आज तक पुस्तकालय नहीं बना है। कार्यवाहक प्रधानाचार्य तानिया उवैस ने बताया कि यहां छात्राओं के पंजीकरण से लेकर स्टाफ की संख्या और अन्य संसाधनों की रिपोर्ट विभागीय अधिकारियों को दी जाती है। इसमें पुस्तकालय न होने की भी बात शामिल है। संवाद

निर्माणाधीन है पुस्तकालय की बिल्डिंग
सहसवान। राजकीय कन्या इंटर कॉलेज का निर्माण वर्ष 2013-14 में इसका निर्माण कार्य कराया गया था। उसके बाद में यहां पर पढ़ाई शुरू हो गई। लेकिन यहां पर आज तक पुस्तकालय नहीं बना था, लेकिन अब इसका निर्माण कराया जाएगा। प्रधानाचार्य केपी सिंह ने बताया की पुस्तकालय जुलाई के अंत पूरा हो जाएगा। इसके बाद में फर्नीचर आदि आएगा। उसके बाद में छात्र-छात्राओं को पुस्तकालय की सुविधाएं सही तरीके से दे सकेंगे। संवाद

कुछेक राजकीय कॉलेजों में पुस्तकालय नहीं हैं। वहां पर पुस्तकालय बनाने के लिए शासन को भेज दिया गया है। जहां पर लाइब्रेरियन नहीं हैं, वहां पर शिक्षकों को अतिरिक्त कार्यभार देकर व्यवस्था को संचालित करा रहे हैं। - डॉ. प्रवेश कुमार, डीआईओएस
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