बदायूं। महिला अस्पताल में रात में एमबीबीएस महिला डॉक्टर की ड्यूटी लगाई जा रही है। ऐसे में रात में ऑपरेशन से डिलीवरी लगभग बंद है। पिछले 11 दिन से महिला अस्पताल में रात में कोई डिलीवरी नहीं हुई। सूत्र बताते हैं कि पूरा खेल निजी अस्पतालों में मरीज पहुंचाने के लिए है। बावजूद इसके जिम्मेदार कहते हैं कि शिकायत आने पर कार्रवाई करेंगे।
महिला अस्पताल में चार सर्जन हैं। अब तक सभी सर्जनों की रोस्टर के हिसाब से ड्यूटी लगती आ रही थी। रात में एक सर्जन भी रहती थीं।इससे प्रसूता का ऑपरेशन संभव हो पाता था। बीते 15-20 दिन से महिला अस्पताल में रात में एमबीबीएस डॉक्टर की तैनाती कर दी गई है। ये डॉक्टर ऑपरेशन नहीं कर सकते। ऐसे में गरीब तीमारदार परेशान होकर खुद ही मरीज को प्राइवेट अस्पताल में ले जाते हैं।
वीआईपी मामले में ऑनकॉल पहुंचती हैं महिला सर्जन
मामला अगर अधिकारियों तक जाए तो जवाबदेही की भी पूरी तैयारी कर ली गई है। रोस्टर में उनके सामने महिला सर्जन को ऑनकॉल ड्यूटी पर दर्शाया जा रहा है। पर हकीकत यह है कि रात में सर्जन तब ही आती हैं जब कोई वीआईपी मामला आता है।
इन मरीजों को किया गया रेफर
कादरचौक निवासी सुरेश कुमार ने अपनी पत्नी रामकेसरी को तीन फरवरी की रात महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। रात भर गर्भवती दर्द से कराहती रही, लेकिन डॉक्टर नहीं आए। ऐसे में परिवार के लोग उसको निजी नर्सिंग होम में लेकर चले गए। आरिफपुर नवादा निवासी राजाराम ने दो फरवरी को पत्नी ज्ञानदेवी को महिला अस्पताल में भर्ती कराया। महिला को तत्काल ऑपरेशन की जरूरत थी, लेकिन सर्जन डॉक्टर ही नदारद थीं। ऐसे में परिवार के लोग उसको भी निजी अस्पताल में लेकर चले गए। फरवरी के बीते पांच दिनों में दातागंज के चितरी गांव की रहने वाली शवीना, शाहजहांपुर की संगीता देवी व उझानी की रामकेसरी को सर्जन डॉक्टर के अभाव में महिला अस्पताल से रेफर किया जा चुका है।
तरन्नुम को समय पर नहीं मिला इलाज, चली गई जान
कुंवरगांव क्षेत्र गांव बाबट निवासी शानू पत्नी तरन्नुम काे रविवार की रात महिला अस्पताल में लेकर आए। उनको ब्लीडिंग हो रही थी। महिला अस्पताल में स्टाफ ने कहा कि सर्जन डॉक्टर होतीं तो ऑपरेशन हो जाता। शानू ने कॉल करके सर्जन को बुलाने को कहा, लेकिन किसी ने डॉक्टर को नहीं बुलाया। ऐसे में वह पत्नी को बरेली लेकर चला गया। तब तक महिला की हालत काफी खराब हो चुकी थी। बताया जा रहा है कि मंगलवार की दोपहर में महिला की बरेली में मौत हो गई। अगर महिला अस्पताल में समय पर इलाज मिल गया होता तो शायद तरन्नुम की जान बच सकती थी।
दस दिन में रात में एक भी ऑपरेशन नहीं
महिला अस्पताल की दस दिन की पड़ताल की तो सामने आया कि 21 जनवरी से 31 जनवरी तक करीब 230 गर्भवती महिलाएं अस्पताल पहुंचीं। दस दिन में रात के समय एक भी ऑपरेशन नहीं किए गए, जबकि दिन में 36 ऑपरेशन हुए। 150 से अधिक गर्भवतियों के सामान्य प्रसव हुए। दस दिन में 40 से अधिक गर्भवतियों को रेफर किया गया। रेफर होने वाले मरीज में अधिकांश रात के समय के हैं।
यह है दस दिन की हालत
दिनांक ऑपरेशन रात ऑपरेशन दिन सामान्य प्रसव रात-दिन रेफर रात
21 जनवरी 00 03 16 04
22 जनवरी 00 04 15 05
23 जनवरी 00 04 14 04
24 जनवरी 00 05 17 05
25 जनवरी 00 03 15 04
26 जनवरी 00 03 14 03
27 जनवरी 00 02 14 03
28 जनवरी 00 03 14 03
29 जनवरी 00 04 14 04
30 जनवरी 00 02 13 02
25 जनवरी 00 03 12 03
रात में ड्यूटी भी लगाई जा रही है। अगर एमबीबीएस की ड्यूटी रहती है तो ऑनकॉल सर्जन को लगाया जाता है। डॉक्टर रात में नहीं रहते, ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है। अगर कोई शिकायत आएगी तो मामले की जांच कराई जाए। - इंदुकांत वर्मा, सीएमएस, महिला अस्पताल
जिला महिला अस्पताल। संवाद- फोटो : संवाद