एनजीओ की देखरेख में दो महीना पहले तक चली आंगनबाड़ी केंद्रों पर हॉटकुक्ड योजना भले ही मार्च के पहले पखवाड़े से कार्यकत्रियों के जिम्मे रही है, लेकिन 20 अप्रैल तक उनकी जेब खाली हो जाएगी। इसके लिए बाल विकास-पुष्टाहार विभाग ने अभी नए बजट में धनराशि अवमुक्त नहीं की है। सवाल तो यह भी उठने लगा है कि पहले की एनजीओ फिर से हॉटकुक्ड मुहैया कराएगा।
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग से जुड़े सूत्रों की माने तो पिछले महीना आंगनबाड़ी केंद्र की समिति के माश्म से कार्यकत्रियों को हॉटकुक्ड मुहैया कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। तीन से छह माह के बच्चों को प्रति बच्चा छह रुयया की दर से हॉटकुक्ड दिया जाता है। साप्ताहिक मैन्यू के हिसाब से प्रत्येक दिन बदल-बदल कर खाद्य सामग्री दी जाती रही। मैन्यू में हलुवा, मीठा और नमकीन दलिया, चना-परमल भी शामिल रहा है।
बता दें कि सितंबर में एनजीओ के जरिए आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को हॉटकुक्ड मुहैया कराना शुरू किया था, लेकिन गुणवत्ता और निर्धारित मानक में शिकायतों के बीच विभाग ने एनजीओ से काम वापस ले लिया था। हालांकि एनजीओ का अभी भुगतान फंसा है, लेकिन फिलहाल नये बजट में हॉटकुक्ड को धनराशि की व्यवस्था नहीं होने से एक बार फिर एनजीओ से ही काम लेने चर्चा होने लगी है। ऐसा इसलिए भी कि एनजीओ के माध्यम से हॉटकुक्ड मुहैया कराने में विभाग अफसर भी किसी न किसी रूप में फायदे में रहते हैं।