दातागंज। रामगंगा नदी का जलस्तर तो कम होने लगा है, लेकिन तटवर्ती इलाकों के लोगों की दुश्वारियां बरकरार हैं। किसानों को फसलों के नुकसान का दर्द है। किसानों का कहना है कि वह खून पसीना बहाकर फसलों को तैयार करते हैं, लेकिन रामगंगा में आने वाली बाढ़ सब तबाह कर ले जाती है। अब तो पशुओं को खिलाने के लिए चारा तक नहीं है।
पिछले कई दिनों से रामगंगा नदी का जलस्तर पिछले दस दिन से बढ़ा चल रहा है। दातागंज से शाहजहांपुर को जाने वाले तीनों रास्ते पूरी तरह से बंद हैं। अन्य सड़कों पर भी पानी भर गया है। 10 से अधिक गांव में बाढ़ का पानी घुस आया है, जो अब धीरे-धीरे घटने लगा है। अभी तक अकट गांव के लोग केवल नाव के जरिए आवागमन कर रहे थे, लेकिन अब वहां पर ग्रामीणों ने पैदल निकालना भी शुरू कर दिया है, हालांकि अब भी कई जगहों पर तीन से साढ़े तीन फुट तक पानी सड़क पर चल रहा है। हजरतपुर से लालपुर खादर के बीच में सड़क पर अब भी तीन से चार फुट पानी चल रहा है।
बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को हुआ है। किसानों का कहना है कि कितनी मेहनत के साथ धान और अन्य फसल तैयार की थीं, बाढ़ ने सब कुछ खत्म कर दिया। अब तो परिवार के पालन पोषण के भी लाले हैं।
यह गांव अब भी हैं प्रभावित
रामगंगा में आई बाढ़ की वजह से दातागंज क्षेत्र के जरतोली, सकतपुर, सिमरिया, नवादा बदन, देवचरी, शेरपुर, हर्रामपुर, कुंडरा मझरा, कटकौरा, शेरपुर, लालपुर खादर, मौजमपुर, गढिया पैगंबरपुर और देयोरनिया समेत 20 गांव सीधे तौर पर प्रभावित हैं।
बाढ़ के पानी से होकर जाते अकट गांव के लोग। संवाद