कादरचौक ब्लाक क्षेत्र के खुड़वारा गांव के स्कूल तक पहुंचा पानी
सहसवान में परौटी गांव में भरा पानी 70 परिवारों ने ली बांध पर शरण
कछला घाट पर गंगा उफन रही हैं। अबतक 1.35 लाख क्यूसेक पानी चल रहा है। क्यूसेक गेज पर गंगा 163.60 तक पहुंच गई है। अभी पानी और आने की आशंका के मद्देनजर बाढ़ खंड सतर्क हो गया है। जमींदाराना बांध कटने की सूचना पर एडीएम वित्त राजेंद्र प्रसाद के निर्देश पर बाढख़ंड के अधिकारियों ने बांध का निरीक्षण किया। वहां बांध बचाने के उपाय किए गए। बढ़ते हुए पानी ने इस क्षेत्र में कटान किया है। सैकड़ों एकड़ फसलें जलमग्र हो गई हैं। सहसवान के गांव परौटी में तीन से चार फिट पानी बह रहा है। 70 से अधिक परिवार जीएम बांध पर परिवार सहित शरण लिए हुए हैं।
गंगा में अभी ऊपरी बांधों से पानी तेजी से बढ़ रहा है। गंगा उबालें ले रही है। बिजनौर डेम से भी 1.58 लाख क्यूसेक पानी पहुंचने वाला है। हरिद्वार से पानी कम होने से कुछ संतोष मिला है।
कादरचौक। गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। जमीदाराना बांध में कुछ स्थानों पर मिट्टी कट जाने के कारण पानी निकलने लगा है। इस संबंध में एक्सईएन ने बताया कि पशु चराने वालों ने बांध को ऊपर कट कर दिया था। बाढ़ खंढ के जेई दिलशाद समेत बाढ़ खंड के लोग इसे ठीक कर रहे हैं। खुड़वारा प्राथमिक स्कूल के पास तक पानी भर गया है। वहीं खुड़वारा, कौआनगला, गनियाई, उलाई खाम सहित वन विभाग की भूमि भी जलमग्न हो गई है। लगभग एक हजार एकड़ की गन्ना मक्का धान की फसलें जलमग्न हो गई हैं। भदरौल से भैसोंर नदी में भी पानी उफान आ गया है। जिससे गंगा के किनारे के गांव में पानी भरने लगेगा। गंगा किनारे के गांव के लोगों को बाढ़ की आशंका सताने लगी है।
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कहां हैं ग्राम निधि से खरीदी गईं लाखों की नावें
कादरचौक। पांच साल पूर्व 2010 में भयंकर बाढ़ आई थी तो सैकड़ों गावों के लोगों को घरवार छोड़कर ऊंचे स्थानों पर रहना पड़ा था। जिसमें कई पशु और इंसानों की जान गई थी। लोगों को बचाने को सेना की मदद लेनी पड़ी थी। इसके बाद तराई क्षेत्र की सभी ग्राम पंचायतों को खंड विकास अधिकारी सुभाष नेमा ने बचाव के लिए ग्राम निधि से नाव खरीदवाई थीं। जो किसी भी पंचायत में सुरक्षित नहीं है, उसके बाद कोई बाढ़ भी नहीं आई और ना ही ये नावें प्रयोग में ली गईं। मुगर्रा टटेई की नाव पानी मे डूब गई। शेष नावों को ना तो नए ग्राम प्रधानों को हेंडओवर किया और न ही उनको ग्राम संपत्ति में दिखाया गया है। कुछ प्रधानों ने तो नाव को पशुओं की नाद बना दिया है। अगर, बाढ़ आती है तो गांव के लोगों को गांव से निकलना मुश्किल होगा।
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उसहैत। गंगा में जलस्तर बढने के कारण गंगा किनारे के गांव वाले सुरक्षित स्थान तलाशने में जुट गए हैं। गंगा किनारे के छपरी नगला, जटा, प्रेमी नगला, रसपुरा, कदम नगला गांवों के लोग खतरे को देखते हुए सुरक्षा के इंतजामों में लग गए हैं।
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रपटा पुल से सोत के पानी में बहा बाइक सवार
बदायूं। रामगंगा का जलस्तर कम होने की सूचना अभी संदिग्ध बनी हुई है। शहर से लगी सोत नदी छह साल पानी से भरी चल रही है। भैंसोर, अरिल और महावा में भी रवानगी आ गई है। यहां बता दें कि यह नदियां पांच साल से अधिक समय से सूखी पड़ी थीं। शहर में सोत नदी के फाट में अतिक्रमण कारियों द्वारा बनाए गए भवनों में भी पानी भर गया है।
ककराला प्रतिनिधि के अनुसार अलीनगर जाने वाले मार्ग पर एक बाइक सवार रपटा पुल से फिसल जाने के बाद सोत नदी के प्रबाह में बह गया। आसपास खेतों में काम कर रहे लोगों ने इसे पानी में बहते देखा लेकिन इसका नाम पता नहीं मालूम हुआ है। इसे लेकर रपटापुल पर काफी देर तक आवागमन नहीं हुआ। गांव वाले परेशान है कि आखिर कौन था जो बाइक समेत सोत के प्रबाह में बह गया।
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सहसवान। नरौरा बैराज से गंगा नदी में लगातर छोड़े जा रहे पानी से गंगा का जलस्तर अचानक बढ़ गया है और गांव परौटी में तीन से चार फुट पानी बह रहा है। इस गांव के 70 से अधिक परिवार जीएम बांध पर परिवार सहित शरण लिए हुए हैं। सूचना पर एसडीएम हरिशंकर यादव, तहसीलदार अहिबरन सिंह, राजस्व निरीक्षक वीरेन्द्रपाल सिंह, विचित्रपाल सिंह, हल्का लेखपाल रामसिंह के साथ स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। बांध पर शरण लिए परिवारों में हरप्रसाद, राकेश, मदनलाल, सुमन कुमार, रामसिंह, नरेश, गोवर्धन, वीरेंद्र, प्रमोद, पोकपाल समेत करीब 70 परिवार शामिल हैं।