चेकिंग करने पहुंची बिजली विभाग की टीम को ग्रामीणों ने खदेड़ दिया। गांव वालों का आरोप था कि टीम चेकिंग के नाम पर अवैध वसूली कर रही थी। चर्चा है कि ग्रामीणों ने एक-दो कर्मचारियों की पिटाई भी की। टीम में शामिल कर्मचारी मुश्किल से जान बचाकर भागे। हालांकि इस संबंध में बिजली विभाग की ओर से किसी के खिलाफ कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई है। विभागीय अधिकारी मामले को झूठा बता रहे हैं।
बुधवार को विद्युत उपकेंद्र पर तैनात चार प्राइवेट और संविदा कर्मचारी स्थानीय बिजली अधिकारियों की शह पर गांव रेलई और नयागांव में चेकिंग करने पहुंचे। जैसे ही कर्मचारियों ने घरों में घुसकर चेकिंग शुरू की। तभी ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया और यह कहते हुए विरोध करने लगे कि अभी कुछ दिन पहले ही विभाग के अधिकारी चेकिंग करके गए हैं। कर्मचारियों ने दोबारा चेकिंग करने की बात कही तो गांव वाले उनसे भिड़ गए। आरोप है कि इस दौरान कर्मचारियों ने कुछ ग्रामीणों को डरा-धमका कर उनसे वसूली भी कर ली। जब इसकी जानकारी बाकी ग्रामीणों को हुई तो उन्होंने एकजुट होकर कर्मचारियों को दौड़ा दिया। चर्चा है कि एक-दो कर्मचारियों की पिटाई भी की गई। इसके बाद यह कर्मचारी नयागांव पहुंचे। यहां उन्होंने ग्रामीणों से बिजली बिल दिखाने को कहा। यहां भी ऐसा ही हुआ। ग्रामीणों ने कर्मचारियों को खरी खोटी सुनानी शुरू कर दी। मामला बिगड़ते देख कर्मचारी खिसक लिए।
मालूम हो कि बिजली विभाग के सचल दल ने गांव रेलई, नयागांव और सिलहरी के एक दर्जन से अधिक लोगों के खिलाफ बिजली चोरी का मुकदमा दर्ज कराया था। कुछ ग्रामीणों को समझौता करके छोड़ दिया था। इस संबंध में जब उपखंड अधिकारी वीके आर्य से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वह उद्यैती में लगे कैंप में हैं। उन्हें इस विषय में कोई जानकारी नहीं है। अगर ऐसा हुआ है तो इसे दिखवाएंगे।
विद्युत विभाग के स्थानीय अधिकारियों के साथ चलने वाली कर्मचारियों की टीम मीटर चेकिंग के नाम पर महिलाओं के साथ अभद्रता करती है। रीडिंग कम करने का झांसा देकर खुलेआम अवैध वसूली करती है। कर्मचारी बिना दरवाजा खटखटाए घरों में घुस जाते हैं। इससे महिलाओं को दिक्कत होती है। यह आरोप उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष दुर्गेशचंद्र माहेश्वरी ने जिलाधिकारी को भेजे पत्र में लगाए हैं।