बदायूं। पांच सौ करोड़ रुपये की ठगी करने के मामले में भागे चल रहे 50-50 हजार रुपये के इनामी पूर्व भाजपा नेता शशिकांत मौर्य और सूर्यकांत मौर्य की धरपकड़ के लिए गौतमबुद्धनगर की एसटीएफ एक माह से जाल बिछाए थी। बदायूं पुलिस भी एसटीएफ को दोनों आरोपियों से जुड़ी हर जानकारी देती रही। दोनों गिरफ्तारी से बचने के लिए मोबाइल फोन स्विच ऑफ करके रखते थे। इन्हें पकड़ने में सर्विलांस बड़ा मददगार बना। आरोपी लखनऊ और दिल्ली में वाई-फाई फ्री वाले स्थानों पर मोबाइल कनेक्ट कर कई नजदीकी लोगों से बातचीत किया करते थे।
आरोपियों के नंबर सर्विलांस पर पहले से लगे थे। बातचीत रिकॉर्ड होने के आधार पर एसटीएफ बदायूं पुलिस को साथ लेकर दोनों आरोपियों के ठिकाने पर पहुंची थी। दोनों ने बरेली, लखनऊ, दिल्ली व उत्तराखंड में कई स्थानों पर अपना ठिकाना बनाया हुआ था। बरेली में भाजपा से जुड़े तीन लोगों के ठिकानों पर रहे।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि लखनऊ में तीन स्थानों पर दोनों ने अपने ठिकाने बनाए थे। बदल-बदलकर ठिकानों पर रहते थे। उत्तराखंड के हल्द्वानी और देहरादून में घूमने जाने की भी चर्चा सामने आई है। सूत्रों ने बताया कि फ्री वाई-फाई से यदि दोनों आरोपी बातचीत नहीं करते तो शायद अभी पकड़ने में और समय लग सकता था। डीआईजी की ओर से 50-50 हजार का इनाम घोषित करने के बाद बदायूं पुलिस दोनों तक नहीं पहुंच सकी, तब एसटीएफ को लगाया गया था।
एसटीएफ यूनिट के एएसपी राजकुमार मिश्रा के अनुसार, डिप्टी एसपी नवेन्दु कुमार के नेतृत्व में एसटीएफ की टीम ने दोनों को कृष्णानगर थाना क्षेत्र के मानस नगर से गिरफ्तार किया। पूछताछ में बताया गया कि शशिकांत ने वर्ष 1988 में बदायूं के मोहल्ला जालंधरी सराय में किराने की दुकान खोली थी। वर्ष 2005 में उसने लायंस हाउसिंग, फाइनेंस एंड लीजिंग कंपनी में फील्ड एजेंट के रूप में काम किया।
इसके बाद अपनी निजी कंपनी अमर ज्योति हायर परचेज खोली, जो शेयर खरीदने व बेचने का काम करती थी। इस धंधे में उसे मोटा मुनाफा नजर आया तो वह आमजन से शेयर खरीदने के नाम पर निवेश कराकर लोन देने का काम करने लगा। इसके बाद शातिर दिमाग वाले दोनों भाइयों ने वर्ष 2016 में अमर ज्योति यूनिवर्स निधि लिमिटेड नामक कंपनी बनाई और लोगों को कम समय में धन को दुगना करने का लालच देकर फंसाना शुरू कर दिया। कंपनियों का कार्यालय बरेली और बदायूं में खोला था।
एसएसपी बोलीं-आरोपियों की संपत्तियों की जांच के लिए लगी है एक टीम
एसएसपी अंकिता शर्मा ने बताया कि एसटीएफ के साथ बदायूं पुलिस भी गिरफ्तारी में लगी थी। सर्विलांस के जरिए दोनों पकड़े गए। दोनों के फ्री वाई-फाई वाले स्थानों पर अपने मोबाइल कनेक्ट कर बातचीत करने की बात सामने आई है। अब इनकी संपत्तियों की भी जांच कराई जा रही है। पुलिस की एक टीम ठगी गई रकम से कहां-कहां पर संपत्तियां खरीदी गई हैं, इसकी जांच में जुटी हैं। कुछ इनपुट मिला है। पूरे साक्ष्य मिलने पर संपत्तियों का चिट्ठा सामने लाया जाएगा।
आरोपियों ने गिरफ्तारी से बचने को चला दांव, पर काम नहीं आया
पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पिछले साल हाईकोर्ट का रुख किया था। उन्हें स्टे भी मिल गया था। इस वर्ष अप्रैल में हाईकोर्ट ने दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी पर लगी रोक हटा दी। इससे पुलिस की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया। आरोपियों ने जुलाई में फिर हाईकोर्ट का रुख किया। उसी केस में रिकॉल कर फिर से गिरफ्तारी पर स्टे लेने में सफल भी हो गए थे, लेकिन 3 जुलाई को दर्ज हुए नए केस में आरोपियों की गिरफ्तारी का रास्ता खुल गया। इसके बाद एसटीएफ ने अपनी जांच तेज की और पुलिस भी इसमें जुटी।
30 सितंबर को होनी है एक केस में सुनवाई
दोनों आरोपियों के एक केस में कोर्ट में सुनवाई 30 सितंबर को होनी है। उस दिन दोनों को जेल से पेश किया जाएगा। वहीं, पीड़ित अधिवक्ता भी पुलिस अधिकारियों से मिलकर दर्ज मुकदमों में दोनों आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल करने की पैरवी करेंगे। बता दें कि दोनों भाइयों ने करीब पांच सौ से ज्यादा अधिवक्ताओं से भी मोटी रकम निवेश कराई और हजम कर ली।
क्या कहते हैं पीड़ित
काफी सालों से यह कंपनी काम कर रही थी। पहले साफ-सथुरा उनका काम था। इसलिए उनमें पैसे लगाए थे। एक समय दिया गया था। वह समय पूरा होने पर पैसे लेने के लिए गए। तब टोकन नंबर दिया गया। जब तक मेरा नंबर आता, उससे पहले कंपनी भाग गई। -गुड्डो, मुस्तफा गंज
थोड़ा-थोड़ा करके रुपये जोड़ रहे थे। ऐसे में कंपनी में पैसा लगाया था कि आने वाले समय में एक मुश्त धनराशि मिली सकेगी। रोजाना 100-100 रुपये जमा किया करते थे, एक लाख 10 हजार रुपये एकत्र हो गए थे। एक दिन कंपनी सारा पैसे अपने साथ ले गई। - विनीत, मुस्तफा गंज
कंपनी में 95 हजार रुपये लगाया था, जो पूरा होने पर एक लाख रुपये से ज्यादा मिलना था, लेकिन कंपनी जब पेमेंट करती, उससे पहले ही वह भाग गई। ऐसे में सारा पैसे डूब गया है। -रोहित सक्सेना, अधिवक्ता
रोजाना थोड़ा-थोड़ा करके धनराशि एकत्र करने की कंपनी के जरिये योजना बनाई थी। इसके तहत इस कंपनी में धीरे-धीरे पैसे लगाना शुरू कर दिया। करीब एक लाख रुपये जमा भी हो गया था। इसी दौरान कंपनी भाग गई। -अंकित सक्सेना, अधिवक्ता
भाजपा की महानगर इकाई में मंत्री था सूर्यकांत
बरेली। बरेली महानगर भाजपा इकाई में सूर्यकांत मौर्य मंत्री के पद पर था। ठगी का मामला सामने आने के बाद पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। कटरा चांद खां मोहल्ले में मौर्य समाज के लोगों की बड़ी संख्या है। सूर्यकांत को इनका नेता माना जाता था और नगर निगम से लेकर अन्य विभागों में उसकी मजबूत पकड़ थी। पार्टी के बड़े नेताओं का उसके घर आना जाना था। वह भी भाजपा के बड़े कार्यक्रमों में शिरकत करता था। यही वजह रही जो बदायूं में रिपोर्ट दर्ज होने के कई दिन बाद तक सूर्यकांत पर बरेली पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। ब्यूरो
बरेली पुलिस और एसटीएफ भी लगी थीं पीछे, छिटका गुडवर्क
बरेली। एसटीएफ नोएडा और बदायूं पुलिस ने 50-50 हजार रुपये के इनामी भाई शशिकांत व सूर्यकांत की गिरफ्तारी कर बड़ा दांव मारा है। सूत्रों के मुताबिक बरेली पुलिस व एसटीएफ भी इनकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास कर रही थी, लेकिन गुडवर्क हाथ से छिटक गया। अब बरेली पुलिस भी इन आरोपियों को रिमांड पर लेकर अपने मुकदमों में शेष कार्रवाई पूरी करेगी। ब्यूरो
गुड्डो, ठगी का शिकार
गुड्डो, ठगी का शिकार
गुड्डो, ठगी का शिकार
गुड्डो, ठगी का शिकार
गुड्डो, ठगी का शिकार