फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

समाधान दिवस पर ही नहीं हो रहा समाधान

Sat, 06 Jun 2015 07:41 PM IST
badaun
विज्ञापन
विज्ञापन
शासन की मंशा के अनुरूप काम नहीं हो रहा है। लापरवाह पुलिस ने थाना, समाधान दिवस औचित्यहीन साबित कर दिए हैं। शिकायतों का निपटारा थाना, समाधान दिवस में नहीं हो रहा है। थाना स्तर पर पीड़ितों की शिकायतें नहीं सुनी जा रही हैं। नतीजन एसएसपी दफ्तर में फरियादियों की भीड़ लग रही है। औसतन रोज एसएसएपी समेत एसपी देहात, एसपी सिटी, के पास 200 फरियादी पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन

छोटे-मोटे मामलों के निराकरण के लिए शासन ने तहसील, थाना और समाधान दिवस की व्यवस्था की है। यह शासन की प्राथमिकताओं में शुमार हैं। शासन स्तर से सख्ती के बावजूद अफसर इनको गंभीरता से नहीं ले रहे। थाना स्तर पर शिकायतों का निपटारा नहीं हो रहा है। थाना, समाधान दिवस औचित्यहीन साबित हो रहे हैं। ऐसे में एसएसपी, एसपी देहात और एसपी सिटी के दफ्तरों पर फरियारियों की भीड़ लग रही है। यहां रोज 200 शिकायतें पहुंच रही हैं। यह हाल पुलिस विभाग का नहीं है। राजस्व विभाग में भी यही स्थिति है। शिकायतों के निराकरण की समीक्षा शासन स्तर से होती है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर थाना, तहसील और समाधान दिवस को तवज्जो नहीं दी जा रही है।

एसएसपी दफ्तर में दो बार आत्मदाह की कोशिश
थाना स्तर पर सुनवाई न होने की वजह से फरियादी एसएसपी दफ्तर पहुंच रहे हैं। एक भी सुनवाई न होने पर आत्मदाह की कोशिश से भी नहीं चुक रहे। पिछले दिनों मोहल्ला सोथा की एक महिला ने सुनवाई न होने पर एसएसपी दफ्तर में आत्मदाह की कोशिश की थी। इसके बाद हत्यारोपियों की गिरफ्तारी न होने पर बक्सा व्यापारी सुभाष शर्मा के परिवार वालों ने एसएसपी दफ्तर पर सामूहिक आत्मदाह की कोशिश की थी। इन मामलों में भी पुलिस की कार्रवाई जस की तस है।
विज्ञापन


रंजिश के मामले ज्यादा
जो भी शिकायतें एसएसपी दफ्तर पहुंच रही हैं उनमें रंजिश के मामले ज्यादा हैं। गौर करने बाली बात यह है कि रंजिश के मामलों में ही हत्या जैसी संगीन वारदातें होती हैं। थाना स्तर पर भूमि विवाद और रंजिश के मामले पुलिस निपटाने में नाकाम साबित हो रही है। डीएम और एसएसपी के सख्त निर्देशों के साथ शासन की मंशाओं की भी थाना स्तर पर अनदेखी की जा रही है।

हर शनिवार को थानों में समाधान दिवस
थानों में हर शनिवार को समाधान दिवस का आयोजन होता है। इनमें शिकायतों के निपटारे की स्थिति संतोष जनक नहीं है। अधिकारी इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर वह भी खामोश हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें