धान खरीद में खपाए जा रहे हजार-पांच सौ रुपये के नोट
सरकारी एजेंसियों के क्रय केंद्रों पर पसरा रहता सन्नाटा
हजार और पांच सौ रुपये के नोट बंद होने के बाद से ब्लैक मनी को धान खरीद में खपाया जा रहा है। इससे प्रचलन में न होने वाले नोटों से धान को बाजार की कीमत से अधिक में खरीदा जा रहा है, जिससे सरकारी एजेंसियों के धान क्रय केंद्रों पर अधिकांश समय सन्नाटा पसरा रहता है, जिससे धान खरीद लगातार गिर रही है। इससे शासन की ओर से दिया गया लक्ष्य पूरा होता नजर नहीं आ रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आठ नवंबर को हजार और पांच सौ रुपये के नोटबंद होने के बाद से काली कमाई करने वाले बंद नोटों को खपाने का जरिया तलाश रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए धान खरीद में करोड़ों रुपये खपाने का अच्छा मौका है, जिसे वे लोग भुना रहे हैं। ब्लैक मनी रखने वाले तमाम लोगों ने आढ़तियों के साथ राइस मिलर्स से भी संपर्क कर रखा है। इन दिनों शासन से तय मूल्यों से अधिक रुपयों में धान की खरीद की जा रही है और भुगतान नगद में किया जा रहा है। ऐसे लोग किसानों को हजार और पांच सौ रुपये के पुराने नोट दे रहे हैं, जिन्हें किसान अपने बैंक खातों में जमा करके चंद एक माह के बाद आसानी से निकाल लेगा।
इससे धान खरीद का लक्ष्य पिछड़ रहा है, जिसे देखकर शासन ने पूर्व में दिए गए लक्ष्य को करीब 60 फीसदी घटा दिया गया है, लेकिन शेष लक्ष्य भी पूरा होता नजर नहीं आ रहा है।
चालू वित्तीय वर्ष में धान खरीद का लक्ष्य एक लाख मीट्रिक टन दिया गया था, जो नोटबंदी के बाद से 40720 मीट्रिक टन कर दिया गया है। बावजूद इसके लक्ष्य फिलहाल पूरा होता नजर होता नजर नहीं आ रहा है। अब तक महज 5758 मीट्रिक टन धान ही खरीदा जा सका है। ऐसे में आगे धान खरीद पूरी होने में भी मुश्किलें नजर आएंगी। यह सब परेशानियां धान खरीद में हजार और पांच सौ रुपये के पुराने नोटों के चलन की वजह से हो रहा है।
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धान खरीद का लक्ष्य पूरा करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। बाजार भाव के बराबर समर्थन मूल्य होने की वजह से किसान खुले बाजार में धान बेच रहा है। एजेंसियों के क्रय केंद्र प्रभारी धान खरीदने में लगे हुए हैं।
संतोष यादव, जिला विपणन अधिकारी