बदायूं। भाजपा मंडल उपाध्यक्ष सुरेश चंद्र गुप्ता की निर्मम हत्या सुनियोजित वारदात की ओर इशारा कर रही है। जिस तरह से उनके सिर पर पीछे से वार किए गए हैं, उससे अंदेशा है कि कातिल पहले से ही उनकी ताक में घात लगाए बैठे थे। वह घर से महज 100 मीटर दूर ओवरहेड टैंक के परिसर के गेट पर पहुंचे, वैसे ही वार कर दिए। इतना भी मौका नहीं दिया कि सुरेश चंद्र पीछे पलटकर देख पाते। पुलिस ने कातिलों का पता लगाने के लिए संदिग्ध मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल खंगालनी शुरू कर दी है। करीबियों के मोबाइल फोन से हुई कॉल को देखा जा रहा है।
मूलरूप से बिनावर थाना क्षेत्र के गांव सिकरोड़ी के रहने वाले सुरेश चंद्र करीब 30 साल से विजयनगला गांव में रह रहे थे। पहले उनकी आरा मशीन थी। कुछ समय पहले उन्होंने काटर फंटी का व्यापार शुरू कर दिया था। इसके अलावा वह राजनीति में सक्रिय थे। इसलिए उन्होंने कई विवादों में हस्तक्षेप किया। कई लोग उनसे रंजिश मानते थे, लेकिन कोई भी विरोध नहीं जता सका। इससे साफ तौर पर यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी रंजिश किससे थी या कौन उनकी हत्या कर सकता है। इस सवाल का जवाब तलाशने में पुलिस को माथापच्ची करनी पड़ रही है।फिलहाल पुलिस ने बेटे निर्दोष की ओर से अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है।
हालांकि पुलिस की तफ्तीश में इतना साफ हो गया है कि कातिल मंडल उपाध्यक्ष की गतिविधि से पूरी तरह वाकिफ था। कातिल को इस बात की पुख्ता जानकारी थी कि रात में ओवरहेड टैंक पर चौकीदार राहुल नहीं आएगा, बल्कि उनके पिता सुरेश चंद्र आएंगे। इसी वजह से उनकी हत्या को अंजाम देने के लिए पूरी तरह तैयार थे। ओवरहेड टैंक परिसर के कमरे के पास सीसी कैमरा लगा है। हत्यारे इससे वाकिफ थे, इसलिए उन्होंने गेट पर ही हमला कर दिया और कैमरे के दायरे में नहीं आ पाए। पुलिस को यह भी अंदेशा है कि कातिल ने मंडल उपाध्यक्ष के घर से निकलते ही उनकी पीछा करना शुरू कर दिया होगा।
बैटरी चोर से पुलिस ने करा दिया था समझौता
मंडल उपाध्यक्ष के बेटे दूसरे निर्दोष ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि उनके घर पर दस महीने पहले चोरी हुई थी। चोर नकदी, जेवर समेत पांच लाख रुपये ले गए थे। उनके पिता की लाइसेंसी बंदूक को भी क्षतिग्रस्त कर दिया था। उस दौरान पुलिस को तहरीर दी गई थी। चोर को पहचानने के चलते पुलिस व गांव के लोगों ने समझौता कर दिया था। चोर पर कार्रवाई नहीं हुई थी। जुलाई की शुरूआत में एक चोर ने ओवरहेड टैंक से इन्वर्टर की दो बैटरी चुरा ली थी। वह अपना मोबाइल कमरे में छोड़ गया था। उससे चोर की पहचान हो गई, लेकिन पुलिस ने इस मामले में चोर को पकड़कर उससे दो बैटरी नई दिलवाकर समझौता करा दिया था। अब उन चोरों के बारे में भी पता किया जा रहा है।
जमीन बंटवारे के कारण भतीजे से हो गया था मनमुटाव
सुरेश चंद्र गुप्ता सात भाइयों में तीसरे नंबर के थे। उनके सबसे बड़े राजेंद्र सिकरोड़ी गांव में रहते हैं। दूसरे नंबर के भाई रमेश बरेली के देवचरा में रहते है। इसके अलावा उमेश, महेश, दिनेश व सतीश विजयनगला में रहते है। इसी महीने राजेंद्र के बेटे अजय गुप्ता ने अपने बाबा विष्णु गुप्ता को बहला फुसलाकर आरा मशीन वाले प्लॉट का बैनामा अपने नाम करा लिया था। इसका सुरेश चंद्र ने विरोध किया था। इसके बाद मंडल उपाध्यक्ष ने अन्य भाइयों के साथ मिलकर करीब 35 बीघा जमीन का बैनामा अपने-अपने नाम करा लिया था। इसको लेकर भी भतीजे व मंडल उपाध्यक्ष में मनमुटाव होने की बात सामने आई है। हालांकि पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे अजय गुप्ता का कहना था कि चाचा सुरेश चंद्र उसकी मदद ही करते रहते थे। उनसे कभी किसी तरह का मनमुटाव नहीं हुआ।
सिर में दो और बाकी शरीर पर चोट के सात निशान
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मंडल उपाध्यक्ष के सिर में दो जख्म मिले हैं, जोकि किसी धारदार हथियार के है। इसके अलावा गर्दन, कनपटी, सीना, चेहरा समेत शरीर अलग-अलग सात चोट के निशान मिले है। इससे कयास लगाए जा रहे है कि कातिलों की संख्या एक से अधिक थी। उन्होंने हत्या में धारदार हथियार व डंडे का इस्तेमाल किया है। सन्नाटे में उनकी हत्या कर दी गई और किसी को भनक न लगी।
- प्राथमिक जांच में सुरेश चंद्र के सिर पर किसी धारदार हथियार से वार किए जाने से मौत होना प्रतीत हो रहा है। परिजनों की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर घटना का खुलासा किया जाएगा। इसके लिए थाने की पुलिस के साथ एसओजी व सर्विलांस टीम को लगाया गया है। - रजनीश उपाध्याय, सीओ सिटी
घटना स्थल पर बिलखते मृतक के परिजन व जुटे लोग। संवाद
घटना स्थल पर बिलखते मृतक के परिजन व जुटे लोग। संवाद