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छह करोड़ की बिजली, 36 करोड़ का हो रहा भुगतान

Wed, 20 Jan 2016 08:34 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बदायूं
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नलकूप विभाग के ट्यूबवेलों को पूरी नहीं मिल रही सप्लाई
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जिले के किसानों के लिए बड़ी संख्या में सरकारी नलकूपों का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके पीछे नलकूप विभाग से अधिक बिजली विभाग दोषी है। यहां बता दें कि 16 घंटे ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली देने की बात हवा-हवाई होकर रह गई है। शहरों में बिजली का शेड्यूल है, लेकिन ग्रामीण इलाकों को कोई समय निर्धारित नहीं है। नलकूपों को तीन-चार घंटे भी बिजली मिल जाए बड़ी बात है। बिजली मिल भी जाती है तो कम वोल्टेज और ट्रिपिंग के साथ बिजली मिलती है। इससे किसानों को काफी मशक्कत उठानी पड़ती है। वहीं कम वोल्टेज के कारण नलकूपों की मोटर भी फुंक जाती है। इससे किसानों के साथ नलकूप विभाग को भी नुकसान पहुंचता है। किसानों को कई दिनों तक सिंचाई से वंचित रहना पड़ता है और विभाग को मोटर मरम्मत के लिए धन खर्च करता है।
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कम वोल्टेज से नलकूपों की संख्या से अधिक फुंक रहे मोटर
नलकूप विभाग के इस वित्तीय वर्ष में अभी तक नलकूपों के 1300 से अधिक मोटर फुंक गए हैं। कुल 1200 नलकूप हैं और उससे 100 अधिक मोटर फुंक गए। यानि 100 नलकूपों के दोहरे मोटर फुंके। यह तो इस वित्तीय वर्ष के जनवरी तक का हाल है। अभी करीब ढाई महीने हैं। कम वोल्टेज  से इनकी संख्या और बढ़ सकती है। नलकूप खंड प्रथम एक्सईएन गिरीश कुमार ने बताया कि बिजली सप्लाई को लेकर किसान और हमारा विभाग दोनों ही परेशान हैं। यह जानकारी ऊपर तक है। यही वजह है कि अब कुछ जिलों में नलकूपों के लिए अलग से बिजली लाइन डाले जाने की योजना बन रही है। इसके पायलट प्रोजेक्ट में बदायूं जिले को भी शामिल किया गया है। बिजली कम मिलने की वजह ही है कि जो हमारे नलकूप छह करोड़ की बिजली फूंक पाते हैं, लेकिन विभाग को 36 करोड़ का साल में भुगतान करना होता है। विद्युत वितरण खंड प्रथम एक्सईएन एके गुप्ता ने बताया कि लो बोल्टेज की समस्या का अपने जिले में ही नहीं पूरे प्रदेश की है। इसके लिए उच्च स्तर से मंथन हो रहा है। नलकूपों को अलग से बिजली दिए जाने के प्रोजेक्ट भी हाई लेबल पर विचाराधीन है। इसके लिए लखनऊ से ही ठेके होने हैं। रही ग्रामीण इलाकों में बिजली सप्लाई की बात तो 10 घंटे कम से कम बिजली दी जाती है।
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