जिले में सबसे अधिक आश्रित हैं किसान नलकूपों से सिंचाई पर
1200 सरकारी तो 9500 प्राइवेट नलकूपों से होती है खेतों की सिंचाई
जिले में नहरें नहीं हैं, लेकिन सिंचाई का सबसे बड़ा साधन बिजली चालित नलकूप हैं। इन नलकूपों को बिजली नहीं मिलने से पूरे जिले के किसान परेशान हाल हैं। मौसम की मार से पीड़ित किसानों को सबसे अधिक पीड़ा नलकूपों को बिजली न मिलने से भी है। जिले में वैसे तो 15 घंटे ग्रामीण क्षेत्र को बिजली का शैड्यूल है लेकिन फिलहाल छह-सात घंटे से अधिक बिजली नहीं मिल पा रही है। आगे बिजली को लेकर और समस्या हो सकती है।
जिले में 10700 से भी अधिक नलकूप हैं। इनमें 1200 नलकूप सरकारी हैं। बिजली चालित नलकूपों की स्थिति बिजली न हो सकने की स्थिति में पूरे जिले की सिंचाई व्यवस्था लड़खड़ाई हुई है। जर्जर लाइनें बिजली व्यवस्था को सबसे अधिक ध्वस्त किए हुए हैं। आगामी मई-जून सिंचाई का समय होगा। इन दिनों में बिजली जो मिल रही है, उससे भी कम मिल सकती है। इसलिए आगे किसानों को और समस्याओं से जूझना पड़ेगा।
सिंचाई बंधु की बैठक की होती है उपेक्षा
बदायूं। सिंचाई बंधु की मासिक बैठक में अधिकारी पहुंचते नहीं। इससे नलकूपों को बिजली न मिलने की समस्या जहां की तहां रह जाती है। किसानों की प्रमुख समस्या की उपेक्षा यहां के आर्थिक विकास को भी कलंक साबित होगी।
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कुछ फीडर पर समस्या हो सकती है। जहां काम चल रहा है लेकिन पूरे जिले में ऐसी समस्या नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र में पुरानी लाइनें भी बदली जानी हैं, ऐसे हालातों में कुछ समस्या हो सकती है। समस्याएं दूर की जाएंगी।
- अनूप चंद्रा, एसई, बिजली विभाग