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Budaun News: जिला अस्पताल में घायल का नहीं किया मेडिकल... तड़पता रहा

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जिला अस्पताल में स्टेचर पर घायल । संवाद
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कासगंज का मामला बताकर चिकित्सक मजरूबी चिट्ठी मांगते रहे
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कहा-भर्ती कर सकते हैं लेकिन मेडिकल नहीं कर सकते- दो घंटे बाद परिवार वाले ले गए कासगंज के जिला अस्पताल

संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। बिना मेडिकल परीक्षण के ही भर्ती करने पर अड़ जाने के कारण गोली लगने से घायल कासगंज बाबूराम (60) जिला अस्पताल में दो घंटे तड़पते रहे। परिवार वालों के सामने दिक्कत यह थी कि मेडिकल परीक्षण नहीं होता तो एक बड़ा साक्ष्य उनके हाथ से निकल जाता। इन्कार किए जाने पर वे लोग बाबूराम को कासगंज जिला अस्पताल ले जाने को मजबूर हुए। हैरानी तो यह है कि सीएमएस ने भी डॉक्टर के तर्कों को सही ठहराया है।
बेटे राजू ने बताया कि शुक्रवार सुबह उसके पिता बाबूराम खेत पर काम कर रहे थे। इसी दौरान पड़ोसी खेत के मालिक ने मेड़ के विवाद को लेकर उनके पिता पर तमंचे से गोली चला दी। कंधे में गोली लगने से बाबूराम घायल होकर वहीं गिर गए। हमलावरों के भागने के बाद घटना की सूचना कासगंज के थाना सिकंदरपुर वैश्य पुलिस को दी गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बाबूराम की गंभीर हालत देखकर उन्हें नजदीक में स्थित बदायूं की कादरचौक सीएचसी भेज दिया। वहां प्राथमिक उपचार देने के बाद जिला अस्पताल बदायूं रेफर कर दिया गया।
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जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में तैनात चिकित्सक ने कासगंज का मामला बताते हुए मेडिकल करने से मना कर दिया। चिकित्सक का कहना था कि इलाज कराना हो तो भर्ती करा सकते हो लेकिन मेडिकल परीक्षण नहीं कर सकते क्योंकि मामला कासगंज जिले का है। इस वजह से करीब दो घंटे तक घायल बाबूराम स्ट्रेचर पर ही दर्द से तड़पते रहे। बाद में परिवार के लोग उन्हें कासगंज के जिला अस्पताल ले गए।

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मजरूबी चिट्ठी न होने का दिया हवाला

जिला अस्पताल में मेडिकल परीक्षण न करने के पीछे मजरूबी चिट्ठी न होने का हवाला देते रहे। मजरूबी चिट्ठी मेडिकल परीक्षण कर रिपोर्ट देने के लिए थाने की तरफ से दी जाती है। रिपोर्ट में उल्लेखित चोटें बाद में न्यायालय में मुकदमा चलते वक्त साक्ष्य के रूप में भी काम आती हैं।


मजरूबी चिट्ठी न हो तो भी किसी सरकारी अस्पताल में हो सकता है परीक्षण
बरेली के वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल भटनागर के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के साफ निर्देश हैं कि यदि कोई घायल सरकारी या निजी अस्पताल पहुंचता है तो उसका मेडिकल परीक्षण किया जाएगा। चाहें वह थाने से मजरूबी चिट्ठी लेकर आया हो या नहीं, साथ में पुलिसकर्मी हो या नहीं। दोनों के न होने पर एक निश्चित शुल्क लेकर परीक्षण किया जाता है। मामला चाहें दूसरे जिले का हो तो भी यही नियम लागू होता है।
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बिना थाने की मजरूबी चिट्ठी के जिला अस्पताल में मेडिकल नहीं किया जा सकता। परिवार वालों से भर्ती करने को कहा गया लेकिन परिवार के लोग तैयार नहीं हुए। मामला कासगंज में गोली लगने का था। बिना मेडिकल के आरोपियों पर पुलिस कार्रवाई नहीं हो सकती थी इसलिए परिवार के लोग घायल को कासगंज के जिला अस्पताल ले गए।
- डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल, बदायूं
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