रबी की फसल पैदा करने से लेकर बिक्री तक किसानों को जिन-जिन झंझावातों से जूझना पड़ा है। उससे किसान पूरी तरह टूट गया है। कटाई, फसल उठान और बिक्री तक किसानों को दर्द झेलना पड़ा है। राहत के नाम पर लागत तक का पैसा किसान को नहीं मिला है। गेहूं बिक्री को ठोकरें खाते हुए किसान को 12-13 सौ रुपये क्विंटल का ही भाव मिल रहा है।
मजदूरों को कटाई रेट पूली पर नहीं गेहूं पर आधारित है। जो किसानों को मंहगा पड़ रहा है। मौसम के रोज ही मिजाज बिगड़ रहे हैं। हड़बड़ी में एक साथ किसानों ने कटाई शुरू कर दी है। मौसम पूरी तरह न खुल पाने के कारण गेहूं की नमी भी नहीं जा रही है। गेहूं खरीद की स्थिति यह है कि सेंटर तो 114 हैं, लेकिन इनमें अधिकतम खुले ही नहीं हैं। 62,000 मीट्रिक टन लक्ष्य के सापेक्ष 14 दिनों में मात्र 283 मीट्रिक टन ही खरीद हो सकी है। गत वर्ष खरीद लक्ष्य 1,02000 मीट्रिक टन था। इस बार 40,000 मीट्रिक टन लक्ष्य कम कर दिया है। खरीद में भी 16 दिनों की कमी कर दी गई है। गेहूं खरीद प्रभारी/ एडीएम वित्त आरपी यादव ने कहा है कि सेंटर सभी खुले हैं, गेहूं अभी पूरी तरह से निकल नहीं सका है। इसलिए सेंटरों पर नहीं आ रहा है। इधर, सेंटरों पर नमी को लेकर जो कटौती की जा रही है, उसकी वजह से किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर जाने की अपेक्षा आढ़तियों की शरण लेना पसंद कर रहा है। आढ़तिया 1,450 सरकारी रेट के गेहूं 1200 से 1300 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीद रहे हैं। किसान को नगद पेमेंट भी कर रहे हैं। जबकि केंद्रों पर गेहूं का भुगतान खाते में किए जाने की व्यवस्था के तहत कम से कम दो दिन तो लग ही रहे हैं।
इसके अलावा मुआवजा तय होने का सिस्टम चारों खाने चित है। लेखपाल ने ही नुकसान तय किया है और उसी ने मुआवजा बांटा है। फसली नुकसान के लिए कृषि, उद्यान, बीमा कंपनी या हार्टीकल्चर अफसरों की राय के क्षति का आकलन हो गया है। लेखपालों पर पूरे गांव का दबाव है। वह गांव में जाते हैं, तो सभी किसान घेर लेते हैं। इसलिए उन्होंने दबंगों के यहां बैठकर ही सभी खेतों का नुकसान तय कर दिया, जिसमें फर्जी बहुत है। कई किसान वंचित भी हुए हैं। मुआवजा की राशि 22.24 करोड़ मिली जिसमें से 10.10 करोड़ का वितरण हो चुका है।
जिले में रबी फसल का ब्योरा
कुल रकबा- 3.29 लाख हेक्टेयर
गेहूं का रकबा- 2.40 लाख हेक्टेयर
आलू का रकबा- 24,000 हेक्टेयर
मसूर का रकबा- 5,600 हेक्टेयर
लाही का रकबा- 12,000 हेक्टेयर,
सरसों का रकबा- 38,000 हेक्टेयर
मटर का रकबा- 3,000 हेक्टेयर
चना का रकबा - 80 हेक्टेयर
बाकी का रकबा- सौंफ, जौ, दलहन आदि
0 सर्वाधिक गेहूं की फसल में हुआ है नुकसान, 60 प्रतिशत से अधिक का सामान्य आकलन।
0 33, 522 किसानों को राहत के 8,90,30,783 रुपये बांटे जा चुके हैं।
0 28,540 हेक्टेयर में 25 से 50 प्रतिशत नुकसान
0 17,590 हेक्टेयर में 50 प्रतिशत से अधिक का नुकसान
0 राहत में 22,24,76000 रुपये प्राप्त
0 अभी तक 55,203 किसानों को बांटी राहत
खरीद में कोई कठिनाई किसान को नहीं आएगी। गेहूं को सुखाकर लाएं, ताकि नमी के हिसाब से कोई कटौती न हो सके। भुगतान भी अधिकतम दो दिनों में किया जा रहा है। सभी सेंटर गेहूं खरीद कर रहे हैं। सेंटर व्यवस्थाएं भी दुरुस्त हैं।
- आरपी यादव, खरीद प्रभारी/एडीएम वित्त
लेखपाल की कार्यशैली से ग्रामीणों में रोष
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव नैथुआ पर तैनात लेखपाल की कार्यशैली को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। उनका आरोप है कि पिछले दिनों बरसात से गेहूं की फसल की क्षतिपूर्ति राशि प्राप्त करने के लिए गांव के लोगों ने आवेदन किया था। जिसपर क्षेत्र के लेखपाल ने आवेदन लेने से मना कर दिया साथ ही किसानों को तमाम तरह से धमकाया। इससे उनमें रोष है। गांव के डोरीलाला, गयाराम, धनश्यामदास, रामपाल, राजेंद्र एवं आगा अवी आदि ने लेखपाल की इस कार्यशैली की जांच कराकर कार्रवाई किए जाने की मांग डीएम से की है।
मौसम का बदला मिजाज, किसान परेशान
सैदपुर। एक बार फि र से बदले मौसम ने किसानों की बेचैनी बढ़ा दी है। गेहूं कि फ सल गिरने के कारण कटाई कराना मुश्किल हो गया है। मजदूर भी मौके का फ ायदा उठाकर मनमाना तरीका अपना रहे हैं। किसान बर्बाद फसल की कटाई कराने के लिए तमाम परेशानी झेल रहा है। आगे जानवरों के लिए भूसे की समस्या होगी, सो चालीस से पचास किलो प्रति बीघा गेहूूं कटाई देने के लिए किसान को मजबूर किया जा रहा है। तब भी कटाई नहीं हो पा रही। अब बिगड़ रहे मौसम से किसान चिंतित हैं। कटाई के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं।