सड़क काटने के मामले में हाईकोर्ट पहुंची थी नगर पालिका
नियत समय में सड़कें ठीक न होने पर देनी होगी 4.49 करोड़ की क्षतिपूर्ति
शहर की सड़कों को काटने का मामला स्थानीय स्तर पर राजनीति गर्माने के बाद हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। नगर पालिका ने इस मामले में हाईकोर्ट में रिट दायर की थी, जिसमें शहर की सड़कों को बगैर अनुमति लिए खोदे जाने के बदले में करीब साढ़े 22 करोड़ रुपये की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने त्वरित निर्णय कर एक हफ्ते में खोदी गई सड़कों को मानकों के अनुरूप ठीक करने के आदेश दिए हैं। ऐसा न कर पाने की एवज में नगर पालिका को करीब साढ़े चार करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी विद्युत विभाग को दिया है, जिससे कि शहर की सड़कों को सही कराया जा सके।
नगर पालिका चेयरपर्सन के निर्देश पर बगैर अनुमति लिए शहर की सड़कों को काटने वाली कंपनी, मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड और राज्य सरकार के खिलाफ नगर पालिका परिषद की ओर से हाईकोर्ट में एक रिट दायर की गई थी। नगर पालिका ने शहर की सड़कों को खोदने का मुआवजा 22 करोड़ 64 लाख 40 हजार रुपये दिए जाने की मांग की थी। इस मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दिलीप बी भोसले और जस्टिस यशवंत वर्मा की बेंच ने ये फैसला सुनाया है। फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड को एक हफ्ते में सड़कों की समुचित मरम्मत करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने पाया कि शहर की सड़कों को इतनी धनराशि में सही कराया जा सकता है। समय सीमा में सड़कों के ठीक न हो पाने के बाद इस धनराशि को राज्य सरकार के कोष से जल्द ही भुगतान करने का आदेश दिया गया है।