पहली अक्तूबर से बेसिक स्कूलों में हुए समय परिवर्तन से शिक्षक और बच्चे सभी परेशान रहे। कड़ाके की पड़ रही गर्मी के बीच पहले दिन ही शिक्षक और बच्चे दोपहर तीन बजे तक परेशान हो गए। बहुत से बच्चे तक हाफ टाइम के बाद भोजन करके घरों को चले गए। शिक्षकों और बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि जब तक गर्मी अधिक रहे तब तक स्कूलों का समय सुबह आठ से दोपहर एक बजे तक ही रहे। इसके लिए जिलाधिकारी को तत्काल कदम उठाना चाहिए।
हर साल पहली अक्तूबर से बेसिक स्कूलों का समय खुलने का प्रात: नौ बजे और बंद होने का दोपहर तीन बजे हो जाता है। गुरुवार को पहले दिन जब बेसिक के बच्चे स्कूल पहुंचे तब गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था। दोपहर तीन बजे तक बच्चों को रोकने में शिक्षकों को दिक्कतें होने लगीं। उसकी वजह यह है कि बेसिक के ज्यादातर स्कूलों में बिजली नहीं है जिसकी वजह से गर्मी से बचने को पंखों की व्यवस्था भी नहीं सकती है। लिहाजा, बच्चे छुट्टी के समय तक पसीने से तर-बतर रहे। बताते हैं कि बहुत से बच्चों की हालत आम दिनों की अपेक्षा कमजोर हो गई सो वह कोई न कोई बहाना बनाकर स्कूल से घरों को चले गए। कमोवेश यहीं हालत शिक्षकों की रही।
इस बारे में कई शिक्षकों और बच्चों के अभिभावकों से बात की गई। शिक्षकों ने कहा कि उन्हें तो अधिकारियों के आदेश का पालन करते हुए यहीं समय स्कूल खोलना और बंद करना है। वहीं बच्चों के अभिभावकों ने कहा कि जब तक गर्मी कम न हो तब तक सुबह आठ से दोपहर एक बजे तक का ही स्कूलों का समय रखा जाए। ताकि बच्चों को पढ़ते समय दिक्कतें न हों। बोले-इसके लिए जिलाधिकारी को तत्काल सार्थक कदम उठाना चाहिए। यदि समय यहीं चलता रहा तो बच्चों के स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। वैसे भी इन दिनों तमाम तरह से संक्रामक रोग फैले हुए हैं।