बदायूं। जिले में विकास को रफ्तार देने के लिए बनने वाले रिंग रोड का सपना आज तक पूरा नहीं हो सका है। जबकि, अगर रिंग रोड की प्रक्रिया पूरी होती तो जिले में विकास के साथ शहर में लगने वाले जाम से भी छुटकारा मिल जाता।
फर्रुखाबाद, शाहजहांपुर, ककराला, उसहैत की तरफ से आने वाले लोगों को शहर के अंदर से होकर निकलना पड़ रहा है। ऐसे में शहर में जाम के हालात बन जाते हैं। इससे न सिर्फ बाहर से आने वाले लोग व शहर के लोग भी परेशान होते हैं। प्रस्तावित रिंग रोड बरेली, दातागंज, ककराला, कादरचौक रोड से होते हुए गुजरता। दूसरा रिंग रोड बाइपास से उझानी मार्ग तक प्रस्तावित था। इससे न सिर्फ शहरवासियों को जाम की समस्या से निजात मिल जाती, बल्कि दूसरे जिलों से आने वाले वाहन चालकों को भी कोई परेशानी नहीं होती। लेकिन, मजबूत पैरवी न होने के चलते यह प्रस्ताव शासन में जाकर अटक गया। सत्ताधारी पार्टी के नेताओं ने भी प्रस्ताव शासन में जाने के बाद कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।
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2019 में डिप्टी सीएम को दिया था प्रस्ताव
-शहर में आयोजित एक प्राइवेट कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 2019 में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य आए थे। उनको इस रिंगरोड को बनवाने के लिए प्रस्ताव दिया गया था। उसके बाद में सर्वे कराकर प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। 2022 में सदर विधायक महेश चंद्र गुप्ता लोक निर्माण विभाग मंत्री जितिन प्रसाद से मिले थे और रिंग रोड को बनवाने की मांग की। उम्मीद थी कि लोगों का सपना पूरा होगा, लेकिन आज तक वह अधूरा ही है।
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18.5 किलोमीटर का बनना था रिंग रोड
-रिंग रोड बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग की ओर से सर्वे कराया था। तब ये बात सामने आयी थी कि यह रिंग रोड 18.5 किलोमीटर लंबा होगा। जोकि राजकीय मेडिकल कॉलेज के सामने से निकाला जाएगा। जो शेखूपुर, कादरचौक, ककराला, उसावां, दातागंज रोड को जोड़ता हुआ बरेली रोड पर मिलेगा। अधिकारियों के अनुसार इसमें सौ गांव की जमीन जाएगी।