बदायूं। बीते जमाने में हृदय की समस्या वृद्धावस्था का रोग कहलाता था, लेकिन आज भागदौड़ भरे जीवन में 25 से 30 साल के युवा भी हृदय रोग से ग्रसित हो रहे हैं। जिला अस्पताल में हर माह पहुंच रहे 40 से 50 मरीजों में से आधे युवा अवस्था के हैं। इसमें सबसे बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण बात सरकारी अस्पताल में ह्रदय रोग विशेषज्ञ का न होना है।
कोरोना के बाद से दिल के मरीज तेजी से बढ़े हैं। इनमें 20 से 30 साल के युवाओं की संख्या भी खासी है। ऐसे में जिले के सरकारी अस्पताल से लेकर मेडिकल कॉलेज तक एक भी हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं है। अगर कोई मरीज जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में पहुंचता है तो एक दो गोली देकर उसके हाथ में रेफर स्लिप पकड़ा दी जाती है।
युवाओं में तेजी से दिल की बीमारी बढ़ रही है। इसका मुख्य कारण मानसिक तनाव है। जिला अस्पताल में जितना संभव होता है उतना इलाज दे दिया जाता है। मरीज को बता दिया जाता है कि जिला अस्पताल में हार्ट के डाॅक्टर नहीं हैं, वह अपनी मर्जी से दूसरी जगह जा सकते हैं।
- डॉ. एसएम कमल, फिजिशियन जिला अस्पताल
हार्ट अटैक होने के कारण
. हृदय की मांसपेशी का खराब होना
. किडनी खराब होना
. फेफड़े की बीमारियां
. थायरायड, शुगर, हाई ब्लड प्रेशर होना।
लक्षण
.थकान और पैरों में सूजन आ जाना।
. खाना न हजम होना, लीवर में सूजन आना।
. घबराहट होना, धड़कन का बढ़ना और पसीना आना।
. सीने में तेज दर्द होना।
. गर्दन की नसों का फूलना व तेज धड़कना।
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क्या बरतनी चाहिए सावधानी
. अधिक वजन नहीं उठाना चाहिए।
. मानसिक व शारीरिक तनाव से बचना चाहिए।
. एक बार में अधिक खाना नहीं खाएं।
. नमक, मीठे खाद्य पदार्थों का कम मात्रा में सेवन करें।
. मांसाहार खाने से परहेज करें।
. पान, तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट का सेवन न करें।