बदायूं / दहगवां। जापानी इंसेफेलाइटिस का मामला सामने आने के बाद बुधवार को भी दिन भर स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग की टीमें दहगवां ब्लॉक के गांव भवानीपुर खल्ली में डटी रहीं। मलेरिया विभाग की टीमों ने भगवानीपुर खल्ली समेत आसपास के गांवों में लार्वा नष्ट करने के लिए अभियान चलाया। इन गांवों में भी लोगों के सैंपल लेकर जांच की गई। अब तक कोई अन्य रोगी नहीं मिला है वहीं यह भी साफ नहीं हो सका है कि भगवानीपुर खल्ली में जापानी इंसेफेलाइटिस का वायरस कहां से पहुंचा।
गांव के एक व्यक्ति के छह माह के बच्चे को कई दिन से बुखार आ रहा था। गांव के डॉक्टरों से लेकर शहर तक इलाज कराने के बाद भी बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ तो डॉक्टर की सलाह पर परिवार के लोग उसे लेकर अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज पहुंचे। यहां जांच में बच्चे को जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि हुई। गौर करने की बात यह है कि जापानी इंसेफेलाइटिस का प्रकोप पूर्वांचल के जिलों और पूर्वोत्तर भारत में रहता है। यह बीमारी फ्लेविवायरस से संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलती है।
आमतौर पर मच्छर ऐसे इलाकों में फ्लेविवायरस संक्रमित होते हैं जहां सुअर पालन होता हो। भवानीपुर खल्ली में एक भी सुअर नहीं है। बच्चे की किसी तरह की कोई ट्रैवल हिस्ट्री भी नहीं है। मंगलवार को गांव में 68 घरों से मच्छर पकड़कर इनको भी जांच के लिए भेजा गया है। इनकी जांच रिपोर्ट का भी इंतजार किया जा रहा है। बुधवार को भी भवानीपुर खल्ली गांव में हेल्थ कैंप लगाकर लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई। हालांकि, इस दौरान कोई दूसरा रोगी नहीं मिला है।
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ग्राम पंचायतों को मुहैया कराया गया पायराथ्रेम, टेमीफॉस और डीडीटी
मलेरिया का सीजन शुरू हो गया है। जिला मलेरिया के लिहाज से पहले ही हाईरिस्क श्रेणी में है। इस बीच जिले में जापानी इंसेफेलाइटिस की दस्तक ने मलेरिया और स्वास्थ्य विभाग की चिंता को बढ़ा दिया है। मलेरिया विभाग की ओर से भवानीपुर खल्ली समेत आसपास की ग्राम पंचायतों को भी पायराथ्रेम, टेमीफॉस और डीडीटी उपलब्ध करा दिया गया है। इन गांवों में नियमित दवाओं के छिड़काव को टीमें बनाई गई हैं। दरअसल, इतना तो साफ हो गया है कि जिले में मच्छर फ्लेविवायरस से संक्रमित होने लगे हैं। अगर वायरस का प्रकोप बढ़ता है तो तेजी से जापानी इंसेफेलाइटिस फैलने का खतरा पैदा हो सकता है।
भवानीपुर खल्ली समेत आसपास के गांवों में लगातार अभियान चलाया जा रहा है। मच्छरों को पकड़कर जांच के लिए भी भेजा जा रहा है। इसकी पड़ताल की जा रही है कि गांव में वायरस कहां से पहुंचा। ग्रामीणों को मच्छरजनित बीमारियों को लेकर जागरूक भी किया जा रहा है। लार्वा नष्ट कराने के साथ दवाओं का छिड़काव कराया जा रहा है।
-योगेश सारस्वत, जिला मलेरिया अधिकारी