बदायूं। जिला अस्पताल में बुधवार को एक बार फिर बिजली कटौती के कारण स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गईं। इस दौरान एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, पैथोलॉजी सेवाओं के साथ ऑपरेशन थियेटर में भी काम रुक गया। यहां मरीजों की लाइन लग गईं। दोपहर एक बजे के बाद सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम ने एक हजार रुपये का डीजल मंगाया तब जनरेटर चल सका और स्वास्थ्य सेवाएं पटरी पर आ सकीं।
जिला अस्पताल में चौबीस घंटे बिजली सप्लाई के लिए खुद का बिजली उपकेंद्र है। अतिरिक्त 33 केवीए की लाइन भी है, इसके बावजूद यहां बिजली की आपूर्ति अक्सर ठप रहती है तो लो वोल्टेज की समस्या आम है। अस्पताल पर कोई बकाया भी नहीं है, इसके बावजूद पावर कॉरपोरेशन के अधिकारियों की लापरवाही के कारण जिला अस्पताल को चौबीस घंटे बिजली नहीं मिल पा रही है। खामियाजा मरीजों और उनके तीमारदारों को भुगतना पड़ता है। इन दिनों मौसमी बीमारियों का प्रकोप चल रहा है। इस बीच बार-बार कई घंटों के लिए अस्पताल में बिजली ठप हो रही है।
बुधवार को सुबह से ही अस्पताल में मरीजों का पहुंचना शुरू हो गया। ओपीडी में दोपहर एक बजे से 900 से ज्यादा नए पर्चे बन चुके थे। बड़ी संख्या में मरींजों को डॉक्टर ने एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, ईसीजी और पैथोलॉजी जांचों के लिए लिखा। रोगी इन विभागों में पहुंचने लगे लेकिन बिजली न होने के कारण यहां काम ठप था। ऐेसे में लाइन लगने लगीं। कई गंभीर रोगी भी जांच के इंतजार में परेशान रहे। दोपहर एक बजे तक बिजली चालू नहीं हुई तो सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम ने एक हजार रुपये का डीजल मंगवाकर बड़ा जनरेटर चलवाया। इसके बाद जांचें शुरू हुईं। बुधवार को बिजली न होने के कारण ओटी में भी काम ठप रहा।
डीजल के लिए लंबे समय से बजट नहीं
जिला अस्पताल को डीजल के लिए लंबे समय से बजट नहीं मिला है। दरअसल, अस्पताल में खुद का बिजली उपकेंद्र और चौबीस घंटे बिजली सप्लाई के लिए अतिरिक्त लाइन है। ऐसे में अब शासन स्तर से यहां डीजल के लिए बजट भी नहीं दिया जा रहा। दूसरी ओर अक्सर घंटों के लिए बिजली गुल हो जा रही है। इसका सीधा असर चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में बिजली कटौती के संबंध में लगातार उच्च अधिकारियों को लिखा जा रहा है। बुधवार को पूरा दिन बिजली नहीं आई। डीजल के लिए बजट नहीं मिल रहा। बुधवार को गई गंभीर मरीजों के अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन समेत अन्य जांचें कराने के लिए एक हजार रुपये का डीजल मंगाकर जनरेटर चलाना पड़ा है।
-डॉ. विजय बहादुर राम, सीएमएस