शनिवार की सुबह यहां पहुंची वन विभाग की लखनऊ की उच्च स्तरीय टीम के साथ एसडीएम बदायूं प्रदीप यादव और राजस्व अधिकारी भी रहे। कादरचौक ब्लाक क्षेत्र के गांव उलाई खेड़ा के जंगल में पहुंचकर टीम ने पौधारोपण की जांच की थी। टीम के मुखिया के चले जाने के बाद उनकी टीम के सदस्य जांच में लगे हुए हैं। इसी के तहत रविवार को टीम सदस्य डीएफओ मुख्यालय घनश्याम ने एसडीओ ईश्वरदयाल के साथ उलाई खेड़ा में जाकर पौधों की गणना का काम किया। बताया जाता है कि उलाई खेड़ा में वर्ष 2008 से यहां कई बार पौधरोपण हो चुका है। करीब 182 हेक्टयर जमीन में टुकड़ों में पौधरोपण हुआ था। इस समय यह पौधे काफी बड़े होने चाहिए। बता दें कि इस प्रकरण में कई बार जांचें हो चुकी हैं। तत्कालीन डीडीओ प्रदीप कुमार सोम ने तो अपनी जांच रिपोर्ट में पूरी तरह वन विभाग के पौधरोपण को फर्जी करार दे दिया था। यही नहीं जमीन को लेकर भी यहां विवाद बना हुआ है। शासन स्तर से कराई गई जांच अभी आगे भी चल सकती है।
जमीन विवाद हल किए बिना जांच है बेमतलब
कादरचौक। पिछले आठ साल से मजरा गंगवरार के प्रधान राजेश्वर सिंह उर्फ राजू कश्यप वन विभाग के भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। इधर, राजू प्रधान ने कहा है कि दो जिलों के प्रशासनिक अधिकारी भी जब भूमि का मसला तय नहीं कर सके हैं तो वन विभाग यह मानकर कि उसी की भूमि में पौधरोपण हुआ है। केवल पौधों की जांच न कर भूमि संबंधी जांच भी उसमें शामिल करे। भूमि संबंधी जांच के बिना पौधरोपण की जांच बेकार है।
राजू प्रधान ने वर्ष 2008 में लड़ाई शुरू की जो जिला स्तर से लखनऊ स्तर तक पहुंची लेकिन परिणाम हासिल नहीं हुए। जांच के नाम पर लीपापोती होती रही। बाद में उन्होंने कोर्ट का सहारा लिया और हाई कोर्ट में उन्होंने अपनी याचिका दायर कर ली है। पिछले दिनों कोर्ट ने इस प्रकरण में शासन से रिपोर्ट तलब कर ली है। शासन ने वन विभाग की उच्च स्तरीय टीम गठित कर जांच कर सभी जानकारियां जुटाई हैं ताकि कोर्ट को स्थिति से अवगत कराया जा सके।