बदायूं। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से संचालित स्कूलों में एमडीएम में बड़े स्तर पर खेल चल रहा है। स्कूलों में छात्र-छात्राएं बेहद कम आ रहे हैं, लेकिन एमडीएम में छात्र-छात्राओं की संख्या ज्यादा दिखाकर सरकारी धनराशि निकाली जा रही है। बीएसए के निरीक्षण में यह बात सामने आयी है। इस पर उन्होंने स्टाफ से स्पष्टीकरण मांगा है।
मध्यान्ह भोजन योजना के तहत परिषदीय स्कूल में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को निशुल्क में निशुल्क भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए प्रति बच्चे के हिसाब से अलग से शासन धनराशि देता है।
बीते दिनों बीएसए ने ब्लॉक कादरचौक प्राथमिक विद्यालय जोरी नगला का निरीक्षण किया। यहां पर पंजीकृत 433 में से 26 अगस्त को 248, 27 अगस्त को 270 छात्र-छात्राओं ने मिड्डे मील का उपयोग हुआ। जबकि 28 को जब बीएसए ने निरीक्षण किया तो उनको मात्र 159 छात्र-छात्राएं ही मिली। ब्लॉक सालारपुर के प्राथमिक विद्यालय बरी समसपुर में पंजीकृत 98 छात्र-छात्राओं में से 27 अगस्त से 51, 28 अगस्त को 73 छात्र-छात्राओं ने मिड डे मील खाया दर्शाया गया। जबकि बीएसए को 29 अगस्त के लिए 23 छात्र-छात्राएं ही विद्यालय में मिले। स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना के तहत निगरानी रखने के लिए जिला समन्वयक को तैनात किया गया है। लेकिन उनकी भी इसमें लापरवाही सामने आ रही है। बीएसए ने संबंधित स्कूलों के स्टाफ से इसको लेकर स्पष्टीकरण मांगा है।
सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है वह अपने स्तर से स्कूलों के निरीक्षण के समय इस बिंदु पर अवश्य ध्यान दें। जिस स्कूल में जाएं, वहां पर एक सप्ताह की रिपोर्ट अवश्य चेक करें। कमियां मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाए।
-वीरेंद्र कुमार सिंह, बीएसए