पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नेताओं के संरक्षण में पशु तस्करी का कारोबार चल रहा है। बिनावर के सेमरमई के अवैध नखासे की तरह और भी तमाम पशु बाजार हैं। पशु तस्कर आवारा पशुओं को चोरी करके भी स्लाटर हाउस चलाने वालों को बेच आते हैं। आईजी विजय सिंह मीना ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने एसएसपी बदायूं से रिपोर्ट मांगी है। वाहनों के साथ ज्यादातर चालक और क्लीनर पकड़ में आए हैं। पकड़े गए लोगों में ज्यादातर कैरियर हैं। पशुओं के असली सौदागरों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। जिन लोगों का भी इस कारोबार में नाम आएगा, सभी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सुबूतों के आधार पर आरोपियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई भी की जा सकती है।
विनावर (बदायूं) के यासीन गद्दी के नखासे के पशु पकड़े जाने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस इस मामले की बारीकी और ईमानदारी से जांच कर ले तो कई चौंकाने वाले चेहरे सामने आ सकते हैं। पशु तस्करी में लिप्त कई ऐेसे चेहरे हैं जो रोज आपके बीच रहकर खुद को समाजसेवा की पहली पंक्ति का व्यक्ति कहते हैं। पश्चिमी यूपी में मुरादाबाद, रामपुर और संभल तो पशु तस्करी का गढ़ बना हुआ है। यहां कई ऐसे लोगों ने स्लाटर हाउस लगा रखे हैं, जो सरकार के बेहद करीबी कहे जाते हैं। उनके यहां भी हाइवे से ही होकर ही पशुओं की खेप जाती है। हाईवे की पुलिस चौकियों पर तैनात पुलिस कर्मी भी पशु तस्करों से मिले हुए हैं। पशु तस्करों की ताकत का एहसास इसी से किया जा सकता है कि थाना कैंट के ठिरिया निजावत खां के स्लाटर हाउस में कटे हुए पशु पकड़े गए। डीआईजी के आदेश पर छापामारी में यह कार्रवाई हुई, लेकिन मुल्जिम अभी तक नहीं पकड़े गए। वह खुलेआम अपने इलाके में घूमते हैं। इसी तरह मीरगंज पुलिस ने लक्जरी बस में प्रतिबंधित पशु पकड़े थे। इस मामले में डीआईजी के दिलचस्पी लेने के बाद रामपुर के चवन्नी गैंग का नाम सामने आया था, लेकिन पुलिस किसी भी पशु चोर को पकड़ ही नहीं पाई। एसपी देहात बृजेश श्रीवास्तव ने सीओ और इंस्पेक्टर को कई रिमांइडर भी लिखे, उसका भी किसी पर असर नहीं हुआ।