हजरतपुर थाने के गांव लालपुर खादर निवासी नेकसू (45) पुत्र मटरू वाल्मीकि तांत्रिक था। पांच दिन पहले नेकसू के बड़े भाई ओमकार की भैंस बीमार हो गई थी। इस पर ओमकार ने नेकसू पर आरोप लगाया कि उसने तंत्र विद्या का इस्तेमाल कर भैंस को बीमार कर दिया है। दोनों पक्षों में इसी बात पर झगड़ा हो गया।
बीती 25 सितंबर की दोपहर में ओमकार और उसके लड़के पूरन ने नेकसू को अपने घर में खींच लिया। पिता-पुत्र ने यहां नेकसू को ईंट-पत्थर से वार किए, इससे वह घायल हो गया। नेकसू की पत्नी नन्ही देवी उसे बरेली लेकर गई। शनिवार को दवा लेने के बाद नेकसू पत्नी के साथ गांव आ गया। शनिवार शाम घर पर ही नेकसू की मौत हो गई। मृतक की पत्नी पुलिस को खबर देने की हिम्मत नहीं जुटा सकी। दिल्ली में रह रहा उसका बेटा घर पहुंचा। रविवार शाम उसने पुलिस को खबर दी। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर नेकसू का शव बरामद कर लिया। नेकसू की पत्नी नन्ही देवी की तहरीर पर ओमकार और पूरन के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी फरार हैं। शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। एसओ हजरतपुर रामनरेश माथुर ने बताया कि मृतक की पत्नी की तहरीर पर मुकदमा कायम कर लिया गया है। नेकसू की हत्या के 24 घंटे बाद पुलिस को खबर मिली। इसके बाद शव बरामद कर पोस्टमार्टम को भेज दिया गया है। मामले की पड़ताल की जा रही है।
कटरी के गांवों में पुलिस का खुफिया तंत्र फेल
दातागंज। हजरतपुर थाने का गांव लालपुर खादर गंगा-रामगंगा की कटरी का गांव है। सुदूर इलाके में बसे काफी पिछड़े इस गांव में कहने को तो पुलिस चौकी भी है, लेकिन यहां पुलिस का खुफिया तंत्र फेल है। कटरी के ज्यादातर गांवों में दबंगों की हुकूमत चलती है। यही वजह रही कि नेकसू की मौत के बाद उसकी पत्नी 24 घंटे तक अपने दो छोटे-छोटे बच्चों के साथ घर में ही कैद रही। वह घर से निकलने की हिम्मत तक नहीं जुटा सकी।
नेकसू ने दो शादी की थीं। छह साल पहले उसकी पहली पत्नी छोड़कर चली गई। पहली पत्नी से नेकसू के तीन संतानें हैं। यह तीनों बेटे दिल्ली में रहकर नौकरी करते हैं। दूसरी पत्नी नन्ही देवी के भी तीन बड़े बेटे दिल्ली में रहते हैं। दो बच्चे नन्ही देवी के साथ रहते हैं। शनिवार शाम नेकसू की मौत हो जाने के बाद नन्ही देवी अपने दो छोटे-छोटे बच्चों के साथ घर में ही रही। उसने फोन पर दिल्ली में रह रहे अपने बड़े बेटे को खबर जरूर दे दी। बड़ा बेटा रविवार शाम घर पहुंचा। इसके बाद घटना की खबर पुलिस को दी गई। कटरी के बीहड़ में बसे इस गांव तक पहुंचने के लिए यातायात के साधन भी नहीं हैं। ऐसे में पुलिस को भी यहां पहुंचने में दो से तीन घंटे का वक्त लग जाता है।