स्वाइन फ्लू की दस्तक के बाद जिले में भी स्वास्थ्य विभाग एलर्ट हो गया है। इस बीमारी में दी जाने वाली दवाओं की खरीद के साथ जिला अस्पताल में अलग से आईसोलेशन वार्ड भी बना दिया गया है। पिछले सप्ताह बरेली में स्वाइन फ्लू का एक मरीज मिलने के बाद यह कदम उठाए गए हैं।
जिले में पांच साल में स्वाइल फ्लू के दो केस मिले हैं। यह दोनों केस ककराला के थे। इनमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग कोई चूक करना नहीं चाहता। स्वाइन फ्लू की दस्तक के साथ स्वास्थ्य विभाग ने इस संक्रामक बीमारी से निपटने की तैयारियां पूरी कर ली हैं। जिला अस्पताल के हृदय रोग विभाग में स्वाइल फ्लू वार्ड बनाया गया है। संक्रामक रोग सेल ने भी संदिग्ध मरीजों की निगरानी शुरू कर दी है।
लक्षण-
- सात दिन से अधिक जुकाम रहना।
- सांस फूलना।
- खांसी में बलगम और बलगम में खून का आना।
- आंख, नाक से पानी आना और दस्त होना।
- हाई ब्लडप्रेशर, बेहोशी आने लगना।
क्या करें-
- भीड़-भाड़ से जहां तक संभव हो दूर रहें।
- छींकते समय टिशू पेपर का प्रयोग करें।
- बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
- सार्वजनिक स्थानों पर मास्क का इस्तेमाल करें।
- लक्षण दिखने पर तत्काल जांच कराएं।
यह केस मिले-
वर्ष 2010 में ककराला निवासी जितिन प्रकाश गुप्ता (एएच1एन1) स्वाइन फ्लू की चपेट में आग गए थे। इनकी इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
वर्ष 2012 में ककराला निवासी अशरफुलनिशा पत्नी डॉ. अब्दुल हनीफ (एएच1एन1) स्वाइन फ्लू की चपेट में आई थीं। समय रहते इनको इलाज मिल गया। इससे इनकी जान बच गई।
प्रभारी संक्रामक रोग नियंत्रण सेल डॉ. कौशल गुप्ता ने बताया कि जिले में 2010 और 2012 में स्वाइन फ्लू के दो केस मिले थे। इसके बाद कोई केस यहां नहीं मिला है। बरेली में स्वाइन फ्लू का एक केस मिलने के बाद हमने तैयारियां पूरी कर ली हैं।