जिला अस्पताल की ओपीडी में लगी मरीजों की लाइन। संवाद
बदायूं। गर्मी में उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन के मामले बढ़े हैं। धूप और गर्म हवा से लोगों का गला सूख रहा है। जिला अस्पताल में इस तरह के 30 से 40 मरीज पहुंच रहे हैं।
अप्रैल के अंतिम सप्ताह में तपिश ने प्रचंड गर्मी का संकेत दे दिया है। बढ़ती गर्मी से जिला अस्पताल में डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या बढ़ी है। फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि डिहाइड्रेशन होने पर प्यास लगना, चक्कर आना, सिरदर्द, थकान, मुंह सूखना, गहरे रंग का पेशाब होना या कम पेशाब आना जैसे लक्षण हैं। उनका कहना है कि गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए सतर्क रहना बहुत जरूरी है। उल्टी या दस्त होने पर शरीर में पानी की कमी होने लगती है। इसका असर किडनी पर भी पड़ता है। पथरी वाले मरीजों को भी गर्मी में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इमरजेंसी में कई ऐसे मरीज आए, जिनको पथरी में दर्द हो रहा था।
इस तरह करें बचाव
फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि धूप में तरल पदार्थ का सेवन करते रहे। धूप में कम से कम निकलें। धूप में निकले तो सिर ढक लें। गर्म हवाओं के चलने पर घर के खिड़की दरवाजा को बंद रखें। किडनी में पथरी वाले मरीजों को गर्मी के दिन में परेशानी और भी बढ़ जाती है। इससे बचाव के लिए अधिक से अधिक पानी पिएं।
डिहाइड्रेशन के लक्षण
-बार-बार प्यास लगना
-गहरा पीला, तेज गंध वाला पेशाब होना
-त्वचा में रूखापन अधिक होना
-चक्कर आना या कमजोरी महसूस करना
-सामान्य से ज्यादा पेशाब आना