ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान परिषदीय स्कूलों में 30 जून तक बच्चों को मध्याह्न भोजन खिलाने का पहले दिन ही विरोध शुरू हो गया। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष एवं प्रांतीय उपाध्यक्ष सतीश चंद्र मिश्र की अगुवाई में शिक्षक नेताओं ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। प्रदेश स्तर पर विरोध होने के कारण जिले के ज्यादातर स्कूलों में शुक्रवार को बच्चों को भोजन वितरित नहीं किया गया।
यहां बता दें कि 21 मई से बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में हर साल ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू हो जाते हैं। किंतु इस साल शासन ने 30 जून तक बच्चों को रोजाना एमडीएम खिलाने का फरमान जारी कर दिया। विभागीय अधिकारियों ने भी आदेश का कड़ाई से पालन कराने को सभी प्रधानाध्यापकों को बच्चों को भोजन खिलाने के आदेश जारी कर दिए। पहले दिन ही इस नई व्यवस्था का शिक्षक नेताओं द्वारा विरोध शुरू हो गया। प्रांतीय स्तर पर भी विरोध के स्वर सुनाई देने लगे सो जिले में अधिकांशत: स्कूलों में आज बच्चों को भोजन नहीं दिया गया।
प्रांतीय उपाध्यक्ष सतीश चंद्र मिश्र के आवास इस मसले को लेकर एक बैठक भी आहूत की गई। साथ ही इस संबंध में डीएम को ज्ञापन भी दिया गया। बैठक में मिश्र ने कहा कि शासन एवं विभाग आए दिन बेसिक शिक्षा में नित नए प्रयोग कर रहा है, जो न्यायसंगत नहीं है। भीषण गर्मी में तापमान 43 डिग्री चल रहा है, ऐसे में ये आदेश बच्चों के जीवन से भी खिलवाड़ एवं राजकोष का दुरुपयोग मात्र ही कहा जा सकता है। प्रांतीय उपाध्यक्ष ने कहा कि ऐसी स्थिति में संगठन द्वारा मध्याह्न भोजन ग्रीष्माकालीन अवकाश की अवधि में न बनाए जाने का निर्णय लिया गया है। यह आंदोलन का संकेत मात्र है। अन्य वक्ताओं ने कहा कि इस मामले को लेकर शिक्षक संघ किसी हाल में खामोश नहीं बैठेगा। चाहे इसके लिए उसे सड़क पर आकर आंदोलन का रास्ता क्यों न अपनाना पड़े। बैठक में अशोक बाबू शर्मा, कैलाश यादव, धीरज शर्मा, राजीव गुप्ता, अनुज शर्मा, नरेश पाल शर्मा, शशिकांत, फरहत हुसैन, आफाक अहमद, गयाराम भारती, देवेंद्र कुमार गुप्ता, प्रतिभा अग्रवाल, अर्चना वार्ष्णेय, सीमा, अरविंद दीक्षित आदि थे।
शिक्षकों की ये हैं मांग
-राज्य कर्मचारियों की तरह 13 महीने का वेतन दिया जाए
-माह मार्च से खाद्यान्न और अप्रैल 2015 से परिवर्तन लागत दिलाए जाए
-अप्रैल 2015 से रसोइया मानदेय व मिलने वाले ग्रीष्मकाल में विद्यालय खुलने पर प्रतिकर उपार्जित अवकाश की सुविधा दी जाए
घूमने का बन गया था प्रोग्राम
चूंकि हर साल 20 मई से ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू हो जाते हैं, सो इस बार भी तमाम शिक्षकों ने बच्चों के संग बाहर घूमने का प्रोग्राम तय कर लिया था। बहुत से शिक्षकों ने तो ट्रेन के टिकट भी बुक करा दिए थे, लेकिन बच्चों को भोजन खिलाने की नई व्यवस्था ने फिलहाल उनके प्रोग्राम पर पानी फेर दिया है। इससे उनमें रोष है।
वॉट्सएप पर विरोध का मैसेज हुआ वायरल
ग्रीष्मकालीन अवकाश के दिनों में बच्चों को भोजन खिलाए जाने की नई व्यवस्था का वॉट्सएप पर भी खूब विरोध हुआ है। जिला और प्रदेश स्तर के नेताओं ने तरह-तरह के मैसेज वॉट्सएप पर भेजकर इस व्यवस्था का हर स्तर से विरोध करने का आह्वान किया। कुछ मैसेज में शिक्षकों ने तरह-तरह के पद नाम रखकर चुटकियां भी ली हैं।