बदायूं। ग्वालियर की एक बिस्कुट फैक्टरी ने शेखूपुर चीनी मिल से दो हजार बोरे चीनी खरीदने का करार किया था, लेकिन चीनी का नमूना फेल होने के कारण उसने चीनी खरीदने से इनकार कर दिया है। करार टूटने से मिल को लाखों का नुकसान हुआ है।
शेखूपुर चीनी मिल लगातार घाटे में जा रही है। चालू पेराई सत्र में भी मिल को करीब तीन करोड़ का घाटा हो चुका है। हर वर्ष पेराई सत्र शुरू होने से पहले चीनी मिल कोऑपरेटिव से कर्ज लेती है। इस कर्ज पर 18 रुपये की दर से ब्याज देना पड़ता है। ऐसेे में हर वर्ष लाखों रुपये ब्याज के रूप में खर्च होते हैं। बावजूद इसके मिल में चीनी की गुणवत्ता को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। यही कारण है कि तीन वर्ष की चीनी का स्टॉक गोदामों में भरा हुआ है। चीनी की खराब गुणवत्ता के कारण इसके खरीदार नहीं मिल।
इसी क्रम में अब ग्वालियर की एक बिस्कुट फैक्टरी ने शेखूपूर चीनी मिल स नमूना फेल हो जाने के कारण दो हजार चीनी के बोरे खरीदने का करार तोड़ दिया है। ऐसे में मिली को करीब 68 लाख रुपये का नुकसान हुआ है और गोदाम भी खाली नहीं हो सके हैं। यहां बता दें मिल अपने रिटायर्ड कर्मचारियों को भी उनके देय का भुगतान नहीं कर पा रही है तो दूसरी ओर किसानों का भी करोड़ों रुपये बाकी है।
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गोदामों के किराये के रूप में देने पड़े 27 लाख
शेखूपुर चीनी मिल तीन साल से चीनी की बिक्री नहीं कर सकी है। चीनी को पीसीएफ के गोदामों में स्टॉक किया गया है। चालू पेराई सत्र में पीसीएफ ने बिना किराया भुगतान किए गोदामों में चीनी स्टॉक करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद मिल प्रबंधन को चीनी स्टॉक के लिए 27 लाख रुपये का भुगतान करना पड़ा। गौर करने वाली बात यह है कि चीनी मिल से चीनी को गोदामों तक पहुंचने के लिए ट्रांसपोर्ट पर भी पर मोटा बजट खर्च किया गया।
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हर साल गिर जाते हैं पुरानी चीनी के दाम
शेखूपुर चीनी मिल के पास तीन वर्ष की चीनी का स्टॉक है। गौर करने वाली बात यह है कि एक साल के बाद चीनी के दाम कम हो जाते हैं। मिल के जीएम राजीव रस्तोगी ने भी इस बात को स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि चीनी एक साल पुरानी होने पर उसकी कीमत प्रति किलो पांच रुपये तक कम हो जाती है। तीन साल के स्टॉक पर कहा कि प्रदेश भर की सहकारी मिलों का यही हाल है।
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ग्वालियर की बिस्कुट फैक्टरी ने दो हजार बोरा चीनी की डिमांड की थी। सैंपल भेजा गया था। शायद किसी कारण से सैंपल पास नहीं हुआ। ऐसे में करार टूट गया है। मिल के पास अभी 1.59 लाख क्विंटल चीनी का स्टॉक है। तीन वर्ष से चीनी की बिक्री नहीं हुई है। पीसीएफ के लिए चीनी स्टॉक को लेकर गोदामों का किराया भी देना पड़ रहा है। चीनी की गुणवत्ता में कोई खराबी नहीं है। चीनी बिक्री के लिए प्रयास लगातार जारी हैं।
- राजीव रस्तोगी, जीएम शेखूपुर चीनी मिल