सहकारी चीनी मिल शेखूपुर में पीएफ फंड में हुए करोड़ों के कथित घोटाले को नए मामले ने हवा दे दी है। मिल के एक कर्मचारी ने जनसूचना में पीएफ एकाउंट्स की जानकारी मांगी। कर्मचारी का आरोप है कि मिल के पास पीएफ एकाउंट्स में 5 वर्ष (1995-99) का रिकार्ड ही नहीं है। मामला मंडलायुक्त तक पहुंच गया है, हालांकि मिल प्रबंधन सिर्फ 2010 से अब तक ऑडिट न होने की बात कहते हुए एकांउट्स की गड़बड़ी से इनकार कर रहा है।
मिल के फिटर मोहम्मद रियाज ने सूचना अधिकार के तहत 1980-81 से अब तक के वर्षों को माहवार और वर्षवार पीएफ में जमा राशि और ब्याज की जानकारी मांगी थी। रियाज को अब तक पीएफ एकांउट्स की सूचना नहीं दी गई है। इस पर रियाज ने सवाल उठाया है कि भविष्य निधि खाते में अगर सब ठीक है, तो मिल कर्मचारियों के ही रुपए को क्यों सार्वजनिक नहीं कर रही है। कर्मचारी का आरोप है कि मिल द्वारा की गई पीएफ कटौती का मिलान करने पर वर्ष 1995-99 तक कोई रिकार्ड नहीं दिखाया गया है। जवाब में मिल की ओर से इतने ही रिकार्ड होने की बात कही गई है। जबकि वर्ष 2001 में पीएफ कटौती की कोई एंट्री नहीं दिखाई गई है। जिससे कर्मचारी भविष्य निधि में घोटाले की आशंका बढ़ जाती है।
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हमारे पास पूरा रिकार्ड है, कहीं कोई रिकॉर्ड गायब नहीं हुआ है। हां, सिर्फ वर्ष 2010 से अब तक का रिकार्ड ऑडिट नहीं हो सका है।
- राजीव जैन, जीएम, सहकारी चीनी मिल शेखूपुर