ग्राउंड रिपोर्ट
लोहिया गांव संजरपुर में खुले में शौच करने को मजबूर हैं ग्रामीण
ब्लाक म्याऊं के लोहिया गांव रहे संजरपुर के 180 में से 162 परिवारों के लिए शौचालय सरकारी रिकार्ड में बनाए जा चुके दिखाए जा रहे हैं जबकि हकीकत यह हैं कि अब भी बडी तादाद में लोगों को शौचालय नसीब नहीं हुए हैं। जिनके बने, वे भी आधे अधूरे हैं। करीब सौ शौचालय ऐसे हैं, जिनकी सीट तो लगी है पर किसी में टैंक नहीं बनाया गया है। गांव वालों का कहना है कि गांव की लगभग 95 फीसदी आबादी खुले में शौच को जाने को विवश है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस लोहिया गांव का डीएम से लेकर कमिश्नर तक स्थलीय निरीक्षण कर चुके है, लेकिन उन्हें भी हकीकत का पता न चल सका। वजह ये है कि निरीक्षण के दौरान उन्हें बता दिया जाता है कि शौचालय निर्माणाधीन हैं लेकिन निरीक्षण के बाद उनका निर्माण पूरा नहीं कराया गया। गांव में कई परिवार ऐसे भी हैं, जिनको जरूरतमंद होने के बाद भी शौचालय का लाभार्थी नहीं बनाया गया है। ग्राम प्रधान सुरेश गिहार का कहना है कि सारे जरूरतमंद परिवारों के लिए शौचालय की डिमांड की गई लेकिन लक्ष्य के सापेक्ष अभी और शौचालय मिलने बाकी हैं। अधूरे शौचालयों का निर्माण कार्य भी कराया जा रहा है।
ग्रामीण बोले
-गांव के पूर्व प्रधान उदयवीर सिंह यादव ने बताया कि गांव में बहुत सारे परिवार आर्थिक रूप से इस लायक नहीं हैं कि शौचालय बनवा सकें लेकिन उनके लिए जो शौचालय मंजूर होकर निर्माण कराए गए, वे आधे-अधूरे बनवाए गए हैं। इससे लोग खेेतों में शौच के लिए जाते हैं।
-गांव के श्यामवीर यादव ने बताया कि गांव में शौचालय न होने की समस्या है। लोग खुले में शौच को विवश हैं। उनकी पत्नी अनीता के नाम से लोहिया आवास मिला था, लेकिन उसके आज तक सौर उर्जा, पंखा आदि सामान आज तक नहीं मिल सका है।
-गांव के विश्राम यादव ने बताया कि वह शौचालय के लिए पात्र है लेकिन उनका शौचालय नहीं बन सका। उनकी पत्नी गुड्डी विकलांग है, जिससे उनको खुले में शौच को जाने में परेशानी होती। उसकी पत्नी को विकलांग पेंशन भी मिल रही है।
-ब्रजेश ने बताया कि उनको भी शौचालय का पात्र नहीं बनाया गया। उन्होंने कई बार ब्लाक स्तरीय अधिकारियों और कर्मचारियों से विनती की लेकिन किसी ने नहीं सुनी। मजबूरन खेतों में जाने को विवश हैं।