हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं शुरू होने में चंद दिनों का समय शेष बचा है। ऐसे में बिजली व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों लचर होने की वजह से लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। छात्र-छात्राएं बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी भी नहीं कर पा रहे हैं।
गांवों में बिजली संकट दिन ब दिन गहराता जा रहा है। बिजली के आने एवं जाने का कोई समय निश्चित नहीं है। आपूर्ति शेड्यूल पूरी तरह ठप हो चुका है, जिससे दिन रात कटौती हो रही है। इमरजेंसी रोस्टिंग और नियमित कटौती ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। वहीं बिगड़ी बिजली व्यवस्था का सर्वाधिक प्रभाव छात्र-छात्राओं पर पड़ रहा है। अंधाधुंध बिजली कटौती के कारण छात्र-छात्राएं बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं, जबकि यूपी और सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाएं निकट हैं। दोनों ही बोर्ड ने अपना परीक्षा कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इस हिसाब से फरवरी में बोर्ड परीक्षाएं शुरु हो जाएंगीं। पढ़ाई के लिए सर्वाधिक उपयुक्त माने जाने वाले समय सुबह और शाम को भी बिजली कटौती किए जाने से बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पा रही है। बिजली कटौती किए जाने की वजह से बच्चे पढ़ नहीं पा रहे हैं। इससे बच्चे मानसिक रूप से परेशान हो रहे हैं। बच्चों की परेशानी के साथ ही अभिभावक भी बहुत परेशान हैं। अभिभावकों ने बिजली कटौती कम किए जाने की मांग की है।
बिजली कटौती पर रोष
बदायूं। युवा जागरुकता समिति की बैठक में शहर में चल रही बिजली की अघोषित कटौती को लेकर आक्रोश जताया गया। कटौती बंद नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई। बैठक में जिलाध्यक्ष राजीव यादव, आशू शर्मा, रोहित सिंह, करन राठौर, धर्मेंद्र सिंह, तलहा, सचिन कश्यप आदि थे।