फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘बहुत ठंड है! पापा, स्कूल आकर ले जाइए’

Wed, 03 Jan 2018 06:23 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,बदायूं
विज्ञापन
student
विज्ञापन
कड़ाके की सर्दी के ये तीन दिन... सर्द हवाओं के झोके हरेक को तीर की तरह चुभे। कोई घरों के अंदर लिहाफ में दुबका रहा तो किसी ने अलाव के सहारे ही घंटों बिता दिए। ठंड से बचाव को घरों में तो संसाधनों की कमी नहीं होती लेकिन जहां संसाधन सीमित होते हैं, जरा उनके बारे में सोचिए। कस्तूरबा आवासीय बालिका विद्यालयों में तो छात्राओं को उपलब्ध संसाधनों के जरिए ही ठंड से जंग लड़नी पड़ी। अफसरों को उनकी परेशानी महसूस हुई लेकिन छुट्टी करने का आदेश एक दिन बाद पहुंचा। छात्राओं ने अपने मम्मी-पापा से यह कहने में गुरेज नहीं किया कि ठंड बहत है, स्कूल आकर हमें घर ले जाइए। 
विज्ञापन

ऐसा ही नजारा बुधवार दोपहर में नगर क्षेत्र के कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में देखने को मिला। परिषदीय विद्यालय तो डीएम के आदेश पर खुले ही नहीं थे लेकिन कस्तूरबा में छात्राओं की संख्या पंजीकृत से करीब 25 फीसदी कम थी। संख्या कम होने की वजह भी ठंड ही रही है। जिससे भी खाने-पीने से लेकर संसाधनों के बारे में पूछो, वही चुप्पी साध लेता लेकिन चेहरों की शिकन दिक्कत बयां करने के लिए काफी थी। चूंकि तीन दिन से ठंड का जिस तरह से प्रकोप बढ़ा, उसके अनुरूप तो एक-दो दिन पहले ही छुट्टी हो जानी चाहिए थी। छुट्टी को लेकर कस्तूरबा विद्यालयों में इसके उलट हुआ। डीएम ने मंगलवार को ही आठवीं तक बच्चों की छुट्टी का एलान कर दिया लेकिन कस्तूरबा विद्यालयों में आदेश बुधवार दोपहर में पहुंचा तो वार्डन ने अभिभावकों को सोमवार तक की छुट्टी का मैसेज देना शुरू कर दिया। दो-तीन छात्राओं का तो यहां तक कहना है कि उन्होंने दो दिन पहले ही घर कॉल कर दिया था। 

खिड़की के शीशे टूटे, नहीं रुकतीं हवाएं 
उझानी। कस्तूरबा विद्यालय नगर क्षेत्र का कैंपस आबादी क्षेत्र से दूर है। ग्राउंड फ्लोर के ऊपर बनी मंजिल के कमरे जिसमें छात्राएं रात्रि विश्राम करती हैं, उनके दो कमरों की खड़कियों के शीशे दो महीना पहले टूट गए थे। सर्दी बढ़ी तो छात्राओं ने खुद ही कोशिश कर टूटे शीशों को टाट-फट्टों से ढक लिया लेकिन जब भी हवा तेज चलती है, छात्राएं सिहर उठती हैं। सर्द हवाओं के झोकों के आगे उनके पुराने लिहाफ भी जवाब दे जाते हैं। 
विज्ञापन


अलाव के पास बैठकर खाना खाने को मजबूर 
उझानी। चार दिन की छुट्टी पर जाने से पहले दोपहर में छात्राओं को खाने में गोभी-आलू की सब्जी और मूंग की दाल के साथ रोटी मिली। कई छात्राएं तो खाना लेकर कमरों में चली गई लेकिन इनमें चार-छह ऐसी भी दिखीं जिनकी हिम्मत नहीं हुई कि वह फर्श पर बैठकर खाना खा लें। उन्होंने लोहे के तसले में आग जलाई फिर उसी के सामने बैठकर खाना खाया। 

टूूूटी कुर्सी के सहारे टिका था दो पैर का तख्त 
उझानी। कस्तूरबा विद्यालय में कमरों के बाहर लॉन में छात्राओं को धूप का आनंद लेने के लिए एक तख्त डाल गया था। तख्त की दशा देखते ही हर किसी की समझ में आ जाएगा कि उस पर बैठे तो जमीन पर गिर पड़ोगे। तख्त के चार पैर (पाहे) होने चाहिए लेकिन उसमें दो पहले ही टूट चुके हैं। एक पाहे के स्थान पर ईंटों का चट्टा तो दूसरे के स्थान पर टूटी कुर्सी का सहारा लगा दिया गया है। 

विद्यालय में छात्राओं के लिए लिहाफ और गद्दों के साथ कंबल भी उपलब्ध हैं। ठंड से बचाव को जो आवश्यक है, वह मुहैया करा दिया जाता है लेकिन सोमवार तक अवकाश का आदेश उन्हें बीएसए की ओर से बुधवार को ही मिला। आदेश मिलते ही दोपहर बाद छुट्टी कर दी गई है।
विज्ञापन

- मंजू रानी, वार्डन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें