नगर और क्षेत्रवासियों को बखूबी याद है राजनाथ सिंह की वाकपटुता। जन समस्याओं को मंच से उठाना और फिर सामने खड़ी भीड़ से अपनी बात का समर्थन कराना। ‘जुगाड़’ शब्द को मजाकिया लहजे में कहना तो आज भी चर्चा का विषय है।
नगर में पिछले दस सालों में दो बार भाजपा नेता राजनाथ सिंह का आना हुआ। एक बार तो रामलीला ग्राउंड में भाजपा प्रत्याशी प्रेमस्वरूप पाठक के समर्थन में जनसभा की वहीं दूसरी बार रोडवेज के समीप आयोजित जनसभा में मेजर कैलाश को जिताने की अपील की थी। इन दोनों जनसभाओं में राजनाथ सिंह ने किसानों की समस्याओं को उठाया और क्षेत्र के अविकसित होने पर अफसोस जताया। दोनों जनसभाओं में बस एक बात कॉमन थी। राजनाथ सिंह ने जुगाड़ शब्द को चुटीले ढंग से परिभाषित किया था। जुगाड़ वाहन चलने की वकालत करते हुए श्री सिंह ने कहा कि अब किसी की जुगाड़ को नहीं छेड़ा जाएगा। कोई भी अपनी जुगाड़ चला सकता है। यह सुनकर तो पंडाल में ठहाके लगने लगे। गांव सतेती में राजनाथ सिंह आए तो लोगोें की जुबान पर उनका पिछला जुमला जुगाड़ को एक बार फिर चर्चा में ला दिया।