ग्रामीण अंचल के खिलाड़ियों को अब सुविधाओं और संसाधनों की कमी के चलते अपनी प्रतिभा को दबाना नहीं पड़ेगा। वह अपनी प्रतिभा को घर के नजदीक ही तराश सकेंगे। बाकायदा इसके लिए उन्हें सभी संसाधन, उपकरण भी मुहैया कराए जाएंगे। सुरक्षा के साथ व्यवस्थाएं भी चाकचौबंद होंगी। महिला/पुरुष ट्रेनर भी होंगे। क्योंकि राज्य सरकार ने स्पोर्ट्स कॉम्पलैक्स पर अपनी हरी झंडी दे दी है। जल्द ही विकास खंड आसफपुर की ग्राम पंचायत कृष्णहरी में इनडोर कॉम्पलैक्स का निर्माण भी शुरू करा दिया जाएगा। इसके अलावा म्याऊ नवीगंज में भी स्पोर्ट्स कॉम्पलैक्स तैयार होगा।
केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से संयुक्त रूप से चलाई जा रही पंचायत युवा क्रीड़ा (पायक) एवं खेल अभियान योजना को अमलीजामा पहनाते हुए पायका योजना को 31 मार्च 2014 से बंद कर एक अप्रैल 2014 से अभियान के अंतर्गत स्पोर्ट्स कॉम्पलैक्स बनाए जाने की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। जिले से पहले चरण में मांगे गए दो प्रस्ताव में से आसफपुर की ग्राम पंचायत कृष्णहरी में इसके निर्माण की हरी झंडी भी मिल गई है। इसके अलावा नवीगंज म्याऊ पर भी कॉम्पलैक्स निर्माण को जल्द अनुमति मिलने की उम्मीद है। इस योजना के तहत ग्रामीण खिलाड़ियों को वही सभी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी जो उन्हें अभी तक पायका के मैदानों में नहीं मिलती थीं। कुल एक करोड़ साठ लाख से तैयार होने वाले स्पोर्ट्स कॉम्पलैक्स में आउटडोर और इनडोर मैदान होंगे। चेंजिंग रूम के साथ शहर के स्टेडियम जैसी सभी सुविधाओं से लैस किया जाएगा। स्पोर्ट्स ऑर्थोरिटी ऑफ इंडिया (साईं) की ओर से डेढ़ लाख फर्नीचर और 15 लाख उपकरण लगाए जाएंगे। इसमें से निर्माण एजेंसी को इनडोर कॉम्पलैक्स बनाने की अनुमति भी दी जा चुकी है।
क्रीड़ाश्री नहीं, मास्टर ट्रेनर रखे जाएंगे
अभी तक पायका के मैदान में क्रीड़ाश्री की लगाए जाते थे। लेकिन स्पोर्ट्स कॉम्पलैक्स में क्रीड़ाश्री नहीं, बल्कि एक मास्टर ट्रेनर तथा एक महिला ट्रेनर, एक पुरुष ट्रेनर लगाए जाएंगे। इन्हें बकायदा मास्टर ट्रेनर को 3500 तथा ट्रेनर को ढाई-ढाई हजार मानदेय भी दिया जाएगा। इतना ही नहीं इनकी योग्यता भी खेल से जुड़ी हो, इनका छह सप्ताह का प्रशिक्षण भी कराया जाएगा।
ग्राम पंचायतों पर होगी पायका के मैदानों की जिम्मेदारी
पायका के मैदानों की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतें रखेंगी। हालांकि स्पोर्ट्स कॉम्पलैक्स के रखरखाव की जिम्मेदारी विभाग की होगी। बता दें कि विकास के क्षेत्र में पिछड़े जिले में वर्ष 2008-09 में क्रीड़ाश्री योजना की शुरूआत गुलड़िया, वजीरगंज से हुई थी। यह दोनों आज भी क्रियाशील हैं। हालांकि इस वर्ष में 98 गांव का चयन किया गया था। बाद में वर्ष 2009-10 में 69 और वर्ष 2010-11 में 49 का चयन किया गया था। लेकिन इसमें करीब 50-60 के बीच ही क्रियाशील रहे। इतने समय में कोई संसाधन और सुविधाएं भी ढंग से मुहैया नहीं कराई जा सकी।
पायका योजना को 31 मार्च 2014 को बंद कर दिया गया है। इसकी जगह एक अप्रैल 2014 से स्पोर्ट्स कॉम्पलैक्स के लिए प्रस्ताव मांगे गए थे। पूूरे प्रदेश में यह प्रक्रिया चल रही है। जिले में दो प्रस्ताव में से आसफपुर के कृष्णहरी को हरी झंडी मिल गई है। इनडोर स्टेडियम के लिए निर्माण एजेंसी को भी परमिशन मिल चुकी है। म्याऊ के नवीगंज में जल्द हरी झंडी मिलने की उम्मीद है। मानदेय पर तीन ट्रेनर भी लगाए जाएंगे। यह मानिए कि वर्ष 2014-15 में दो कॉम्पलैक्स तैयार किए जाएंगे। सांई की ओर से फनीर्चर और उपकरण दिए जाएंगे। पायका की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की होगी।
- भूपेंद्र सिंह, जिला युवा कल्याण अधिकारी।