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वन विभाग के आंकड़ों में खेल, कागजों में सींचे जा रहे मृत पौधे

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बदायूं। देश में वैसे भी पेड़-पौधों की संख्या घटती जा रही है। जंगल खत्म हो रहे हैं, जिससे जलस्तर लगातार कम हो रहा है। प्रदूषण बढ़ने के कारण ही नहीं बल्कि पेड़ कटने से भी ग्लोबल वार्मिंग का सबसे बड़ा खतरा मंडरा रहा है। ये पूरे देश के लिए चिंता का विषय है, लेकिन इसके प्रति वन विभाग गंभीर नहीं है। यहां तो सिर्फ खानापूर्ति वाला रवैया अपनाया जा रहा है। पिछले दिनों जिन पौधों को बड़े जोर-शोर से रोपा गया, उतनी जिम्मेदारी से उनकी देखभाल नहीं हुई। नतीजतन अधिकतर पौधे नष्ट हो गए।
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वर्ष 2018 से लेकर 2020 तक बिसौली और दातागंज इलाके में एक अभियान चलाकर पौधे लगाए गए थे। केवल बिसौली की बात करें तो इस इलाके में इन दो साल में 117700 पौधे लगाए गए। बताया गया था कि जहां खाली जगह या सरकारी जगह दिखी, वहां पौधरोपण किया गया। वन विभाग के अभिलेखों के अनुसार बिसौली इलाके में 109109 पौधे आज भी जीवित हैं, जबकि 8591 पौधे नष्ट हो चुके हैं, लेकिन इस इलाके में आज की स्थिति कुछ और है। इस इलाके में जहां-जहां पौधे लगाए थे, आज वहां अधिकतर पौधे नष्ट हो चुके हैं। कहीं-कहीं तो सारे पौधे ही नष्ट हो गए। पता ही नहीं चल रहा कि यहां कभी पौधरोपण हुआ था। कई जगहों का हाल तो यह है कि जहां पौधे लगाए गए थे वहां अब उपले थापे जा रहे हैं। लगाए गए पौधों का कहीं पता तक नहीं है।
कुछ इसी तरह का हाल दातागंज इलाके का है। इस रेंज में वन विभाग के अभिलेखों के अनुसार 870600 पौधे लगाए थे। उनमें 809974 पौधे ही जीवित बचे हैं, जबकि 60626 पौधे मृत हो चुके हैं। वन विभाग जितने पौधे लगाने का दावा कर रहा है। मौजूद स्थिति में उससे आधे पौधे जीवित नहीं हैं।
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जनसूचना के तहत मांगा गया था रिकॉर्ड
जिले में कितने पौधे जीवित हैं या मृत हो चुके हैं, ये जानकारी जनसूचना के तहत मांगी गई थी। आरटीआई कार्यकर्ता बुंदू खां ने जनसूचना के तहत ये जानकारी मांगी थी, लेकिन उन्हें सिर्फ बिसौली और दातागंज इलाके की जानकारी उपलब्ध कराई गई। उसके अलावा रिकॉर्ड उपलब्ध न होना बताया गया।
जिम्मेदारी से नहीं होती पौधों की सिंचाई
-वन विभाग या जिला प्रशासन पौधरोपण जितनी जिम्मेदारी के अनुसार करता आ रहा है। उतनी जिम्मेदारी से उनकी सिंचाई नहीं होती। कहीं-कहीं पौधे लगाकर छोड़ दिए जाते हैं। फिर उन्हें दोबारा कोई देखने नहीं जाता। इससे पानी के अभाव में पौधे सूख जाते हैं।
पोस्टमार्टम हाउस पर लगाए थे करीब सौ पौधे, आठ-दस ही जीवित
-पिछले साल डीएम कुमार प्रशांत और अन्य अधिकारियों ने पोस्टमार्टम हाउस पर जाकर पौधरोपण किया था। यहां एक दो नहीं करीब सौ पौधे लगाए गए होंगे, लेकिन आज की ताजा स्थिति ये है कि मात्र आठ-दस पौधे ही जीवित बचे हैं। वह भी इसलिए बचे हैं कि उनके नजदीक से नाले का पानी निकल रहा है। इससे उन्हें नमी मिल रही है।
स्वयंसेविकाओं ने चलाया पेड़ संरक्षण जागरूकता अभियान
-पार्वती आर्य कन्या संस्कृत इंटर कॉलेज की छात्राओं ने पौधरोपण और पेड़ संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान चलाया। राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम में प्रधानाचार्य मधु शर्मा ने कहा कि पर्यावरण का संतुलन बनाये रखने के लिए बड़े स्तर पर पौधे लगाए जाएं। उनका संरक्षण भी किया जाए। तभी पर्यावरण सुरक्षित रहेगा। कार्यक्रम में आए मुख्य अतिथि डॉ. प्रशांत राठौर ने रोगों से बचाव और इलाज के बारे में जानकारी दी। इस दौरान अमिता आलोक, रीना सिंह, पूनम यादव और लेखराज मौजूद रहे।
पौधारोपण केवल वन विभाग द्वारा ही नहीं कराया जाता। ये तो प्रशासनिक स्तर पर भी चलता है। अन्य विभाग भी लगाते हैं। नियम तो ये है कि जिन्होंने पौधा लगाया है, उसकी देखभाल भी वही करे, तब कहीं पौधा बचता है। मैं तो यही कहूंगा कि पौधा लगाने के साथ-साथ उसकी देखभाल भी जरूर करनी चाहिए।
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विवेक कुमार गुप्ता, डीएफओ
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