राजाराम महिला इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य के पद को लेकर चल रहे विवाद में नया मोड़ आ गया है। खुद को वरिष्ठ प्रवक्ता बताकर प्रधानाचार्य बनाने की मांग कर रहीं अनीता पांडेय के लिए मुश्किलें बढ़ गईं हैं। विभाग का तर्क है कि उनकी तैनाती नियम विरुद्ध तदर्थ प्रवक्ता के तौर पर हुई थी। जिसे एक शिकायत के बाद प्रबंधक ने खत्म कर दिया था। उन्होंने हाईकोर्ट में इसके खिलाफ रिट दाखिल की जिसे खारिज कर दिया गया था। अब डीआईओएस वीना यादव ने इस दौरान लिए गए वेतन की रिकवरी का आदेश जारी कर दिया है।
यहां बता दें कि राजाराम महिला इंटर कॉलेज में इस समय सुषमा कथूरिया प्रधानाचार्य हैं, जो वर्ष 2014 में रिटायर हो चुकी थीं, लेकिन वह इसी पद पर आसीन हैं। इसके पीछे उनका तर्क है कि राज्यपाल पुरस्कार मिलने के कारण उनका दो साल का सेवा विस्तार हुआ है, लेकिन प्रधानाचार्य पद की दावेदारी कर रहीं प्रवक्ता अनीता पांडेय के लिए अब मुश्किल बढ़ गई है। सुषमा कथूरिया की तैनाती के खिलाफ उन्होंने भी हाईकोर्ट की शरण ली थी। इस मामले में कोर्ट ने डीआईओएस वीना यादव को तलब कर जल्द मामले को निपटाने के आदेश दिए थे।
डीआईओएस ने दोनों पक्षों के बयान लिए थे। 11 फरवरी को डीआईओएस वीना यादव ने कालेज प्रबंधक को पत्र भेजा। पत्र के अनुसार प्रधानाचार्य पद की दावेदार अनीता पांडेय की नियुक्ति वर्ष 1988 में एक सत्र के लिए अस्थायी रूप से की गई थी। प्रबंधक ने 1991 में कार्यमुक्त कर दिया। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर कोर्ट ने स्टे कर दिया था। वर्ष 2009 में स्टे खारिज हो गया। डीआईओएस ने कहा कि रिट खारिज हो जाने के बाद अनीता पांडेय 15 अप्रैल 2009 से वेतन पाने की अधिकारी नहीं हैं। उन्होंने प्रबंधक को आदेश दिया कि उनसे रिकवरी कर रकम चालान के जरिए राजकीय कोष में जमा कराई जाए। इधर, डीआईओएस के पत्र के बाद कॉलेज में तरह-तरह की चर्चा है।