उधर अखिलेश बनाम शिवपाल, इधर पशोपेश में प्रत्याशी
जब से समाजवादी पार्टी में कुनबे की जंग शुरू हुई है, जिले के पार्टी कार्यालय पर गतिविधियां शून्य हो गई हैं। उन नेताओं के सामने ज्यादा संकट है जो चुनाव लड़ने की तैयारी में है। आखिर अपने को किसका कहें। अखिलेश का या शिवपाल का।
प्रदेश के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार की कलह जिस तरह से खुलकर सामने आई, उसने जनता से ज्यादा कार्यकर्ताओं को हैरान किया है। जो पार्टी पदाधिकारी या मंत्री हैं वह तो लखनऊ चले गए या फोन स्विच आफ कर लिया। पशोपेश की स्थित में वे हैं, जिन्हें चुनाव लड़ना है। उन्हें अपने प्रचार में मुश्किल आई। आखिर क्षेत्र में जनता को क्या जवाब दें। इन प्रत्याशियों का कहना है कि जब सब ठीक होगा तो प्रचार को निकलेंगे। विदित हो कि जिले में पांच सीटों पर सपा के उम्मीदवार लगभग घोषित हैं।
पिछले तीन दिनो से पार्टी कार्यालय पर सन्नाटा पसरा है। वहां इन दिनों आने-जाने वालों की संख्या भी न के बराबर है। अधिकतर कार्यकर्ता अब इसका पटाक्षेप चाहते हैं। उनका कहना है कि ये विवाद लंबा खिंचा, तो पार्टी को चुनाव में नुकसान होगा, जिसकी भरपाई नहीं हो सकेगी।
सोशल मीडिया पर छाया ड्रामा
सोशल मीडिया पर मुलायम परिवार का ड्रामा इन दिनों चर्चा में है। बार-बार नेताओं के अंदर बाहर के घटनाक्रम पर भी लोगों ने तल्ख टिप्पणी की हैं। कभी बर्खास्त, कभी बहाल, जनता त्रस्त, नेता मालामाल। इस आशय की खूब पोस्ट हो रही है। लेकिन इतना जरूर है कि कुछ लोगों का कहना है कि इससे अखिलेश को छवि परिपक्व बनकर उभरी है।