कभी व्यावसायिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रही सोत नदी आज संकट में है। इसके फाटों पर लगातार भवन बनते जा रहे हैं। अभिलेखों में ऐसा खेल हुआ है कि प्रशासन भी इस कार्य को रोक नहीं पा रहा है। सोत पर अतिक्रमण से जुड़े ऐसे लोग हैं जो प्रभावशाली हैं। सोत पर कब्जों को लेकर जब-जब अभियान लिया गया उसकी हवा निकल गई। इस बार भी राजस्व टीम निराश होकर बैठ गई है। वहीं राहत कार्यों में व्यस्त प्रशासनिक मशीनरी का लाभ उठाते हुए अतिक्रमणकारियों ने अपना काम फिर शुरू कर दिया है।
चार महीने पहले जीवन दायिनी कही जाने वाली सोत नदी के फाटों को अतिक्रमण मुक्त कराए जाने को डीएम ने राजस्व टीम का गठन किया था। तहसीलदार राजमणि मिश्र के नेतृत्व वाली इस टीम में कई राजस्व निरीक्षक और लेखपाल शामिल किए गए। इस टीम ने शुरू में ही तेजी दिखाई और कुछ लोगों का अतिक्रमण हटवा दिया। अतिक्रमण हटा तो कई प्रभावशाली लोग भी फंसे। उनकी पहुंच माने या दबाव कार्रवाई धीरे-धीरे शिथिल हो गई। पुराने रिकार्ड खंगाले जाने के नाम पर काफी विलंब हुआ, लेकिन बाद में यही हुआ कि अधिकतर लोगों ने सोत में ही कई किसानों के खेत होने के प्रमाण दे दिए। अधिकतर लोगों ने यहां जमीने खरीदीं हैं और व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए इनका निर्माण हो रहा है।
पुराने अभिलेखों को खंगाला गया है। अगर, इन अभिलेखों में भी कोई गड़बड़ियां की गई होंगी तो उनके पहले के रिकार्ड देखे जाएंगे। चकबंदी प्रक्रिया से पहले के अभिलेखों का निरीक्षण किया जाएगा। इस संबंध में राहत वितरण में व्यस्तता के बाद एक बार फिर इस मामले में जांच को आगे बढ़ाया जाएगा। -राजमणि मिश्र, तहसीलदार सदर, बदायूं