नवजातों की सघन चिकित्सा को नहीं लगानी होगी दौड़
जिला महिला अस्पताल में आधुनिक एसएनसीयू यूनिट शुरू
नवजात शिशुओं के इलाज को अब बरेली और निजी अस्पतालों की दौड़ नहीं लगानी होगी। जिला महिला अस्पताल में बनाए गए 16 बेड के एसएनसीयू (सिक-न्यू बार्न केयर यूनिट) ने काम शुरू कर दिया है। 16 बेड के इस आधुनिक वार्ड में नवजात शिशुओं का इलाज शुरू हो गया है। फिलहाल यहां तीन डॉक्टर, सात स्टाफ नर्स और एक आया की तैनाती की गई है। बाद में स्टाफ बढ़ाया जाएगा।
जिला महिला अस्पताल में करीब दो करोड़ रुपये की लागत से एसएनसीयू पिछले साल ही बनकर तैयार हो गया था। 16 बेड के इस वार्ड में सभी आधुनिक चिकित्सा उपकरण, सुविधाएं उपलब्ध हैं। जन्म के बाद कुछ शिशुओं का वजन कम होता है। ऐसे में उनको सघन चिकित्सा की जरूरत होती है। अब तक जिले में कुछ निजी नर्सिंगहोम पर ही यह सुविधा थी। यहां इलाज महंगा होने की वजह से गरीब अपने बच्चों का इलाज नहीं करा पाते थे। संपन्न लोगों को भी बरेली तक की दौड़ लगानी पड़ती थी। ऐसे में कई बार समय से इलाज न मिलने की वजह से नवजात की मौत हो जाती थी। जिला महिला अस्पताल में यह आधुनिक यूनिट शुरू होने के बाद गरीबों को इसका लाभ होगा। संपन्न लोगों को भी बरेली की दौड़ नहीं लगानी होगी।
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औसतन रोज भर्ती हो रहे तीन नवजात
बदायूं। एसएनसीयू में औसतन रोज तीन नवजात भर्ती हो रहे हैं। यूनिट के संचालन की जिम्मेदारी डॉ. श्रीकृष्ण, डॉ. राजीव रोहतगी और डॉ. अजीत को दी गई है। तीनों डॉक्टर यहां आठ-आठ घंटे ड्यूटी देंगे। यूनिट में प्रसूताओं
को स्तनपान के लिए जागरूक करने की व्यवस्था भी की गई है।
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जिले में कम होगी शिशु मृत्यु दर
बदायूं। एसएनसीयू शुरू होने के बाद जिले में शिशु मृत्युदर भी कम होगी। आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में प्रसव के बाद 100 में से 15 शिशुओं की मौत हो जाती है। मातृ-शिशु मृत्युदर पर नियंत्रण के लिए सरकार कई कार्रवाई भी चला रही है। एसएनसीयू शुरू होने के बाद शिशु मृत्युदर में कमी आने की उम्मीद है।
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सिक-न्यू बार्न केयर यूनिट शुरू हो चुकी है। आधुनिक यूनिट में नवजातों का इलाज भी शुरू हो गया है। औसतन रोज दो से तीन नवजात यहां भर्ती हो रहे हैं। जरूरत पड़ने पर स्टाफ बढ़ाया जाएगा।-डॉ. नेमी चंद्रा, सीएमओ