बदायूं। कभी सपा सरकार में पुलिस और प्रशासन पर धौंस जमाने वाले डोडा तस्कर नजमुल की धाक आज भी कम नहीं हुई है। इसकी वजह यह है कि उसने अपने ‘झंडे’ का रंग बदल लिया है। उसके ऊपर ‘पावरफुल नेेताजी’ का हाथ है और पुलिस ढुलमुल रवैया अपना रही है तो नजमुल उन्हें दिखकर भी नहीं दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी उसकी गिरफ्तारी होना तो दूर, पुलिस उसका सुराग तक नहीं लगा सकी है, या यूं कहें कि पुलिस सुराग लगाना ही नहीं चाह रही है। जानकारों की मानें तो अब तो यह भी चर्चा है कि अलापुर से उसावां ट्रांसफर हुई विवेचना होने में भी नजमुल का हाथ हो सकता है।
विगत 15 जुलाई को पुलिस की स्पेशल टीम ने डोडा तस्कर नजमुल के ककराला स्थित अब्दुल्ला डिग्री कॉलेज में छापामारी की थी। इस दौरान कॉलेज से करीब साढ़े चार क्विंटल डोडा बरामद हुआ था। उसके कॉलेज में डोडा की पिसाई होती थी। पुलिस ने डोडा पीसने की मशीन, एक ट्रैक्टर-ट्रॉली और एक बाइक बरामद की थी। मौके से गभियाई निवासी आशु पुत्र रियासत, श्यामलाल पुत्र रामदीन व ब्रह्मपुर निवासी धर्मेंद्र पुत्र रामबहादुर पकड़े गए थे। तीनों ने खुद को मजदूर बताया था, जबकि नजमुल पुत्र लुकमान भागने में कामयाब रहा था। इसके बावजूद पुलिस ने चारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। कुछ समय तक इसकी जांच अलापुर इंस्पेक्टर ने की लेकिन बाद में इसकी जांच उसावां एसओ राजीव कुमार को ट्रांसफर हो गई।
अगर पिछले रिकॉर्ड पर गौर करें तो नजमुल अब तक किसी मामले में लंबे समय के लिए जेल नहीं गया, जबकि उसके खिलाफ कई मामले दर्ज हुए थे। एक-एक करके सभी मामलों में समझौता करा दिया गया और एफआर लग गई। बताया जाता है कि डोडा तस्करी के मामले में भी कुछ ऐसा होने जा रहा है। जब से डोडा तस्करी की विवेचना उसावां एसओ के हाथ में पहुंची है, तब से नजमुल की गिरफ्तारी की चर्चा भी ठंडी पड़ गई है। पुलिस ने दबिश देना भी लगभग बंद कर दिया है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि पुलिस को पता है कि नजमुल कहां है, लेकिन
‘नेताजी’ की वरदहस्ती के चलते उस पर हाथ डालने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है।
अभी हम इस मामले की जांच कर रहे हैं, साथ ही नजमुल की तलाश भी चल रही है। जल्द ही हम कोई न कोई कार्रवाई जरूर करेंगे। डोडा तस्कर के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
राजीव कुमार, एसओ उसावां