बिल्सी के जैन मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेती महिलाएं। संवाद
बिल्सी। मोहल्ला संख्या दो स्थित श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में दूसरे दिन छुल्लक विशंक सागर महाराज व भरत सागर महाराज के सानिध्य में 256 अर्घ्य समर्पित किए गए। जैन समाज के महिला-पुरुषों ने इन्द्र व इन्द्राणियों के रूप में भगवान शांतिनाथ की पूजा की।
बुधवार को श्रद्धालुओं ने मोक्ष प्राप्ति की कामना के लिए सिद्ध भगवान की आराधना की। महाराज विशंक सागर ने कहा कि जैन धर्म में 24 तीर्थंकर समय-समय पर संसार चक्र में फंसे जीवों का कल्याण करने के लिए धरती पर आए हैं। छठी शताब्दी में तीर्थकर भगवान महावीर के समय जैन दर्शन का पुनावरण हुआ। जैन पंरपरा में पूजा, उपासना का विशेष महत्व है। उपासना में सिद्ध चक्र महामंडल विधान की अधिक महिमा है। यह ऐसा अनुष्ठान है जो हमारे जीवन के समस्त पाप, ताप और संताप नष्ट करता है। इस मौके पर सार्थक जैन, दिव्या जैन ,सीमा जैन, चुन्नी जैन, रेखा जैन, रीता जैन, इंदु जैन, रिंकी जैन आदि मौजूद रहे। संवाद