उझानी में रामकथा से पहले व्यास गद्दी की आरती करते गंगा आरती समिति के सदस्य और यजमान। संवाद
उझानी (बदायूं)। रामलीला मैदान में चल रही कथा में सोमवार को त्रिदंडी स्वामी गोपालाचार्य ने श्रीराम के वनगमन की लीला का प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। कहा, श्रीराम ने वन गमन के समय राजसी वस्त्र त्यागकर वल्कल वस्त्र धारण करके जैसा देश, वैसा परिवेश का संदेश दिया था।
गोपालाचार्य महाराज ने कहा कि वन गमन में निषादराज के यहां पहुंचे भगवान राम ने वल्कल धारण करने के साथ ही अपनी जटाएं बांध लीं थीं। सुमंत द्वारा वन में छोड़े गए भगवान श्रीराम-लक्ष्मण और सीता के प्रति अयोध्या वासियों के प्रेम का वर्णन सुनकर श्रोताओं की आंखें नम हो गईं। उन्होंने भगवान राम के यमुनापार श्याम वट पर ठहरने भारद्वाज ऋषि का स्वागत स्वीकारने और चित्रकूट में महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में पहुंचने तक की कथा का वर्णन किया।
इससे पहले रजनीश गुप्ता समेत तमाम गणमान्य लोगों ने व्यास गद्दी की आरती की। संचालक प्रवीण शर्मा ने श्रोताओं को पूजन का महत्व समझाया। कहा, कोई भी धार्मिक कार्य शुरू करने से पहले भगवान का एकाग्र मन से आह्वान करना चाहिए। कथा में पहुंचे गंगा आरती सेवा समिति के पदाधिकारियों में क्रय विक्रय सहकारी समिति के चेयरमेन किशनचंद्र शर्मा और संजीव गुप्ता ने गोपालाचार्य महाराज का ठाकुर श्रीबांके बिहारी की चित्र और अंग वस्त्र भेंट किए। साथ ही सनातन धर्म के प्रचार में उनके योगदान की तारीफ की। इस अवसर पर समिति के सदस्यों में रोहन शर्मा, पंकज माथुर, शिव भारद्वाज आदि मौजूद थे।