कछला गंगाघाट से बदायूं सहित पीलीभीत, बरेली जिलों के शिव भक्त सावन में जल लेने पहुंचने हैं। कांवड़ियों के जत्थे रात को मंदिरों में विश्राम करते हैं। गौरीशंकर देवालय, बिरुआबाड़ी और हर प्रसाद मंदिरों में शिव भक्तों को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। मंदिरों में पूरे सावन शिव भक्तों के लिए भंडारों का आयोजन भी होगा। पुलिस-प्रशासन ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर लिए हैं। कांवडिय़ों का रूट मैप तैयार करने के साथ ड्यूटियां भी लगा दी गई हैं। मंदिरों में महिला पुलिस की भी तैनाती रहेगी।
रसलिंग का है विशेष महत्व
गौरीशंकर देवालय में उत्तर भारत का इकलौता रसलिंग है। सावन में महादेव का अभिषेक करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। मंदिरा में कांवड़ यात्रा को लेकर सभी तैयारियां कर ली गई हैं।-मुद्गल स्वामी
प्राचीन शिवलिंग है आस्था का केंद्र
बिरुआबाड़ी मंदिर का प्राचीन शिवलिंग लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है। सावन में लाखों की तादाद में कांवडिय़ा महादेव का जलाभिषेक करते हैं। मंदिर कमेटी ने व्यवस्था पूरी कर ली हैं।- सुरेंद्र पांडेय