इसे शासन की लापरवाही कहें या चीनी मिल प्रशासन की, लेकिन इस चक्कर में जिले की एकमात्र सहकारी चीनी मिल में रविवार को तीसरी बार गन्ना न होने की वजह से पेराई बंद कर दी गई। इसके साथ ही मिल की टरबाइन और चेन में खराब होने की वजह से दो बार मिल बंद हुई थी। चालू पेराई सत्र में 22 दिसंबर को मिल में गन्ना पेराई का शुभारंभ हुआ था। पेराई शुरू होने से अब तक मिल कुल दो लाख 72 हजार क्विंटल गन्ना ही पेर सकी।
शुरुआती दौर में किसानों को सट्टा पर्ची समय से जारी न होने की वजह से उन लोगों ने मिल को गन्ना देना कर दिया। इससे अक्सर मिल नो-केन के चलते बंद हो जाती है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह भी कि गुलडिय़ा समेत जिले में स्थित अन्य गन्ना मंडियों में 240 रुपये से लेकर 260 रुपये प्रति क्विंटल तक गन्ना दलाल खरीद रहे हैं। नौ-नगद तेरह उधार वाली कहावत पर अमल करते हुए गन्ना किसान दलालों को गन्ना बेचकर रुपये सीधे कर रहे हैं। इसी वजह से सहकारी चीनी मिल में गन्ने की आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
इसके पीछे किसानों का तर्क यह रहता है अभी तक शासन से गन्ना मूल्य तय नहीं किया गया है, तो चीनी मिल उन लोगों का भुगतान कब करेंगी। इसलिए मंडियों में गन्ना बेचना उन लोगों के लिए बेहतर है। ऐसे में मिलों को नो-केन होने की वजह से भविष्य में भी बंद होना पड़ सकता है।
गन्ना न देने वाले किसानों का सट्टा होगा निरस्त
शेखूपुर चीनी मिल के जीएम राजीव जैन ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे लोग मिल को ही गन्ना दें। गन्ना किसान मिल को गन्ना देकर अपना सट्टा सुरक्षित करा लें। यदि किसानों ने इस बार गन्ना नहीं दिया तो उनका सट्टा निरस्त कर दिया जाएगा, जिससे आगामी सत्रों में उनका गन्ना मिल में खरीदा नहीं जाएगा।
किसानों से मिल को गन्ना देने के प्रयास कर हैं। दोपहर करीब 12 बजे मिल में गन्ना न होने की वजह से पेराई बंद हो गई। जल्द ही किसानों से गन्ना लेकर मिल में पेराई शुरू की जाएगी।
जीएस यादव, चीफ केन ऑफिसर, चीनी मिल