सामान्य तौर पर गंगा में तीन हजार क्यूसेक तक पानी रहता है। मेला ककोड़ा की तैयारियों के बीच गुरुवार को अचानक पानी बढ़ गया। इस समय गंगा में नरौरा बैराज से छोड़ा गया 7,500 क्यूसेक पानी बह रहा है। अचानक पानी बढ़ जाने को लोग तमाम कयास लगा रहे थे, लेकिन इन सभी कयासों को विराम देते हुए नरौरा बैराज के पानी नियंत्रक ने बताया कि ऊपरी गंगा और मध्य गंगा नहर के बंद हो जाने के कारण बैराज से पानी छोड़ा गया है। अभी मुख्य स्नान पर्व पर पानी और छोड़ा जाएगा।
रुहेलखंड के मिनी कुंभ कहे जाने वाले मेला ककोड़ा के लिए घाटों और गंगा किनारे मैदान पर काम जारी है। इसी दौरान गंगा में पानी बढ़ने लगा। जिला पंचायत के कर्ता धर्ता इसे लेकर परेशान हो उठे हैं। बाढ़ खंड के अधिकारियों को भी नरौरा डेम से कोई जानकारी नहीं दी गई। नरौरा पानी नियंत्रक रमेश चंद्र यादव ने बताया कि ऊपरी गंगा और मध्य गंगा नहर समेत कई नहरें बंद कर दिए जाने के कारण डेम से 7,500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। कैनाल बंद रहने तक यह पानी चलता रहेगा। उन्होंने बताया कि गंगा घाट पर लगने वाले मेला के दौरान पूणिमा से एक दिन पूर्व तीन दिन के लिए पानी चलता रहेगा। उस समय 10,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है। दस बार भी इतना पानी छोड़ा जाएगा।
मेला ककोड़ा में इस समय मौजूदा पानी से ढाई हजार क्यूसेक अधिक पानी होगा। इसी हिसाब से जिला पंचायत को स्नान पर्व पर घाटों की तैयारी करनी होगी।
मेलास्थल पर सात फिट तक गहरा है घाट
कादरचौक। मिनी कुंभ मेला ककोड़ा की तैयारिया शनै-शनै गति गतिमान हो रही हैं। जिला पंचायत के कर्मचारी भी प्रतिदिन काम की निगरानी कर रहे हैं। गंगा घाट इस समय स्नान के लिए खतरनाक है। छह-सात फुट की गंगा ढांग हैं। जो स्नान के समय खतरनाक साबित हो सकती है।
इस समय तय किये गए गंगाघाट पर जलस्तर स्नान लायक से अधिक बह रहा है। किनारे पर ही छह-सात फिट गहराई तक पानी है। गोताखोरों से पानी की गहराई का आकलन की कराया गया। गंगा का जलस्तर हमेशा ही नवंबर के प्रथम सप्ताह में बढ़ जाता है। इन दिनों में नहरों की सिल्ट सफाई करने के लिए नहरों को बंद कर दिया जाता है। गत दो वर्षों से मेला भी नवंबर के प्रथम सप्ताह में ही लगता रहा है। तब नरौरा से जल न छोड़ने का राजी किया गया था। इस बार अधिमास होने के कारण मेला नवंबर के अंतिम सप्ताह में होगा। तबतक सिल्ट सफाई के बाद नहरों में पानी छोड़ा जाने लगेगा। 10 हजार क्यूसेक से अधिक पानी होगा तो नरौरा को पानी न छोड़े जाने को कहा जाएगा।
ड्यूटी 24 घंटे मजदूरी 227 रुपये
कादरचौक। गंगाघाट पर स्थानीय गोताखोरों की ड्यूटी लगाई जाती है। जो गंगा में किसी भी अनहोनी रोकने को कटिबद्ध रहते हैं। ठंड में भी गंगा में डूबने से बचाने के लिए प्रयास करते हैं। हेड मल्लाह ने बताया कि 24 घंटे का पारिश्रमिक के रूप में इनको मात्र 227 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी दी जाती है। इसके अतिरिक्त कपड़े और कंबल भी जिला पंचायत की ओर से दिए जाते हैं। 25 मल्लाह घाट पर तैनात रहते हैं। पांच मल्लाह रिजर्व में भी रखे जाते हैं।
इस बार टैंटेज व्यवस्था मध्य प्रदेश की
कादरचौक। मिनी कुंभ के लिए अधिकांश रूप से आगरा का टैंट आता रहा है, लेकिन इस बार आगरा के टैंट व्यवसायी ने मेला का टेंडर नहीं लिया। मध्य प्रदेश, भिंड का टैंट लगेगा। वहीं सिरकी पाल शौचालय के रिक्त ठेके भी हो गए हैं। जिसे पुराने ठेकेदार दिनेश सक्सेना ने ही लिया है।
क्षेत्रीय लोगों को मिला रोजगार, बन रहे गांवों में चूल्हे
कादरचौक। मेला की तैयारियों में साफ -सफाई सड़क निर्माण से लेकर अन्य व्यवस्थाओं के लिए स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार मिल रहा है। 70 से 100 लोग रोज काम कर रहे हैं। जंगल से काटी गई पतेल की भी बिक्री हो रही है। आसपास के लोग अभी से मिट्टी के चूल्हे बना रहे हैं। पुआल और लकड़ी भी मेला में बिक्री के लिए एकत्र की जा रही है।