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माता-पिता की सेवा सबसे बड़ा तीर्थ : आचार्य रूप

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गुधनी में आयोजित सत्संग-यज्ञ में हिस्सा लेती महिलाएं। संवाद - फोटो : katra news
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बिल्सी। गांव गुधनी स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर पर रविवार को आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर सत्संग का लाभ उठाया। कार्यक्रम की शुरुआत गायत्री मंत्र जाप और हवन यज्ञ के साथ हुई। इसके बाद आचार्य संजीव रूप ने उपस्थित लोगों को अपने प्रेरक विचारों से संबोधित किया।
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उन्होंने कहा कि सच्चा धर्म, कर्म और व्यवहार में बसता है। पूजा और दिखावे में नहीं। उन्होंने कहा कि धार्मिक वह नहीं जो केवल मंदिर जाता है, बल्कि वह है जो अपने घर को ही मंदिर बनाता है। आचार्य ने कहा कि धर्म का अर्थ किसी विशेष पूजा पद्धति या वेशभूषा से नहीं है, बल्कि मनुष्य के भीतर की मानवता और संवेदनशीलता से है, जो व्यक्ति दूसरों की भलाई में खुशी महसूस करता है और किसी के दुख में सहानुभूति रखता है, वही सच्चे अर्थों में धार्मिक कहलाने का अधिकारी है। इस मौके पर शशि आर्य, पदमा रानी, अरुणा रानी, सत्यम आर्य, तृप्ति शास्त्री आदि मौजूद रहीं।
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