बदायूं। कोरोना की दूसरी लहर में ताबड़तोड़ मौतों के बाद इंतजाम में फेल हुआ स्वास्थ्य विभाग तीसरी लहर से निपटने की तैयारी में जुट गया है। वैक्सीन और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही लोगों के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता परखने का काम शुरू किया गया है। इस कड़ी में विभाग ने जिले में सीरो सर्वे कराया है। इसमें टीमों ने घरों में जाकर 31 जगहों से 744 सैंपल लिए हैं। इनकी मेरठ में जांच होगी। इससे पता लगेगा कि बदायूं के लोगों के शरीर में एंटीबॉडी का क्या स्तर है।
कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में तहलका मचा रखा है। विशेषज्ञ तमाम तरह के दावे कर रहे हैं। साथ ही वायरस को रोकने के लिए एंटीडोज भी तैयार की गई। नई दवाएं और बचाव के इंतजाम निकाले जा रहे हैं ताकि संभावित तीसरी लहर से उतना नुकसान न हो जितना दूसरी लहर में हो गया। इस क्रम में शासन की ओर से पूरे प्रदेश में सीरो सर्वे कराया जा रहा है। यह सर्वे इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की ओर से कराया जा रहा है। इसमें बदायूं जिले में नौ से 11 जून तक के बीच में सर्वे कराया गया है। इसमें स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने 31 जगहों से 744 लोगों के ब्लड सैंपल लिए हैं। इसमें सभी उम्र के लोगों को शामिल किया गया है ताकि इन लोगों से लिए गए सैंपल की जांच विविधता पूर्ण तरीके से की जा सके।
जांच टीम में शामिल सदस्य
शासन के निर्देश पर जिले में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से 15 टीम बनाई गई। इन टीमों में एक डॉक्टर, एक फॉर्मासिस्ट, एक एएनएम, एक आशा को रखा गया है।
इन गांव से लिया सैंपल
अंबियापुर, नदैली, थानपुर, कामापुर बेहटा, मोगर, कछला, उसावां, अशोकपुर, खरखोली, गुलड़िया, महरौली, आजमगढ़ मढ़िया, कमानपुर बेहटरा समेत 31 जगहों से स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सैंपल लिए हैं।
पांच से 17 साल के बच्चों के भी लिए सैंपल
जिले भर से जो सैंपल लिए हैं। उनमें एक टीम ने एक जगह से आठ पुरुष, आठ महिला और पांच साल के बच्चों से 17 साल के किशोरों तक के सैंपल लिए गए हैं।
कैसे होता है सीरो सर्वे
इसे सेरोलॉजी टेस्ट के जरिए किया जाता है। इस टेस्ट में व्यक्ति के शरीर में खास संक्रमण के खिलाफ बनने वाले एंटीबॉडीज की मौजूदगी का पता लगाया जाता है। देखा जाता है कि क्या व्यक्ति के इम्यून सिस्टम ने इंफेक्शन का जवाब दिया है। ह्यूमन बॉडी में दो तरह की एंटीबॉडीज बनती हैं, जिनमें आईजीएम और आईजीजी शामिल हैं। ये दोनों ही संक्रमण के खिलाफ काम करते हैं। आईजीजी एंटीबॉडीज शरीर में लंबे समय तक रहते हैं।
वर्जन
- जिले में सीओ सर्वे का काम पूरा कर लिया है। यह ब्लड सैंपल मेरठ के लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज भेजे जाएंगे। वहां जांच से जो नतीजे आएंगे उससे जिले के लोगों के शरीर में एंटीबॉडी का पता लगेगा। उच्चाधिकारी इन नतीजों के आधार पर आगे की रणनीति बनाएंगे।
- डॉ. कौशल गुप्ता, जिला महामारी रोग विशेषज्ञ