सीडीओ ने एक दिन के वेतन कटौती के आहरण पर लगाई रोक
चतुर्थ श्रेणी कर्मी को भेजकर बुलवाने पड़े बाबू
मुख्य विकास अधिकारी प्रताप सिंह भदौरिया बाल विकास कार्यालय के कार्यों की स्वयं निगरानी कर रहे हैं, लेकिन कोई सुधार नहीं हो पा रहा है। गौर करने वाली बात है कि राज्य पोषण मिशन की समीक्षा बैठक में आदेश के बाद भी बाल विकास कार्यालय के बाबू उपस्थित नहीं हुए। सीडीओ को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भेजकर उनको बुलवाना पड़ा। सीडीपीओ राधा सक्सेना भी नहीं आईं। नाराज सीडीओ ने एक सीडीपीओ और पांचों बाबुओं के अग्रिम आदेश तक वेतन आहरण पर रोक लगाते हुए एक दिन के वेतन कटौती करने के भी निर्देश दिए।
गुरुवार को विकास भवन स्थित सभा कक्ष में सभी संबंधित अधिकारियों के साथ राज्य पोषण मिशन के कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक में सीएमओ भी अनुपस्थित रहे। आगंनबाड़ी केंद्रों के मासिक निरीक्षण के लिए नोडल अधिकारी नामित किए गए थे। इसमें जिला उद्यान अधिकारी, वीडीओ दहगवां, आसफपुर, उपायुक्त आजीविका मिशन, भूमि संरक्षण अधिकारी तथा उप जिलाधिकारी सदर द्वारा मासिक निरीक्षण रिपोर्ट उपलब्ध न करने पर सीडीओ ने जब जबाव तलब करने के निर्देश दिए तो संबंधित अधिकारियों द्वारा बताया गया कि उनके द्वारा बाल विकास कार्यालय में रिपोर्ट प्राप्त करा दी है। कुछ अधिकारियों ने प्राप्त करने वाले बाबू के हस्ताक्षर भी दिखाए, जिस पर सीडीओ ने कार्यालय के प्रधान सहायक शकील अहमद अंसारी को प्रतिकूल प्रविष्टि दिए जाने और वेतन आहरण पर रोक लगाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कार्यालय के प्रधान सहायक लज्जा राम, जाहिदा बी, कनिष्ठ सहायक राधेलाल शर्मा, महेंद्र पाल के वेतन आहरण पर रोक लगा दी है। सीडीओ ने नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि माह के प्रथम बुधवार को माह की दस तारीख तक आगंनबाड़ी केंद्रों का नियमित रूप से निरीक्षण कर रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। 30 मई, 2015 से अब तक 132 बच्चे पोषण पुर्नवास केंद्र में भर्ती रहकर सामान्य स्थिति में हैं। अप्रैल 2016 तक कुल 70 हजार 113 महिलाएं ऐसी चिन्हित हैं, जिसमें 51,490 महिलाओं का होमोग्लोबिन 11 प्रतिशत तथा 18,623 महिलाओं का होमोग्लोबिन सात प्रतिशत है। जनपद में सितंबरए 2015 तक 14,281 कुपोषित बच्चे चिह्नित किए गए थे और वर्तमान में 16,318 बच्चे अभी भी कुपोषण का शिकार हैं। इलाज, प्रयास और पोषाहार के बल पर 6,623 कुपोषित बच्चे सामान्य श्रेणी में आ चुके हैं।