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सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में फंसा विवाद का पेंच

Sun, 03 Sep 2017 11:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो,बदायूं
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कूड़ा - फोटो : अमर उजाला
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 कई वर्षों से लंबित पड़ा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट कंपनी ए टू जैड और कार्यदायी संस्था में विवाद होने की वजह से प्लांट के कार्य में पेंच फंसा है।करीब छह करोड़ रुपये खर्चे के बाद मशीनेें गली जा रही हैं। निकाय अधिकारी के मुताबिक इस पूरे प्रोजेक्ट को तैयार करने के लिए 12 करोड़ रुपये की धनराशि देकर कार्यदायी संस्था सीएनडीएस को कार्य सौंपा था, लेकिन कंपनी ए टू जेड और कार्यदायी संस्था में विवाद की वजह से पेंच फंस गया।         
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नगर पालिका प्रशासन ने इस प्लांट का प्रस्ताव तो सात-आठ साल पहले भेजा था। उसके कुछ दिनों बाद मंजूरी मिल गई थी। प्लांट निर्माण के लिए 12 करोड़ रुपये स्वीकृत होने के बाद काफी समय जमीन चयनित करने के चक्कर में काफी देर होती रही। इसके बाद जब दातागंज रोड से करीब तीन-चार किलोमीटर दूर उतरना और सैयपुरा गांव में जमीन ले ली गई, लेकिन फिर प्लांट चालू नही हो सका। सदर तहसील क्षेत्र के सैयपुरा गांव में कार्यदायी संस्था कंस्ट्रक्शन इन डिजाइनिंग सर्विसिंग (सीएनडीसी) प्लांट का निर्माण करा रही थी। प्लांट का कुछ काम अकार्डो हाइड्रो एअर कंपनी को सौंपा गया। कंपनी ने बैंक गारंटी के रूप में लखनऊ की एक बैंक से जो गारंटी लगवाई उसमें कंपनी के खाते में कोई पैसा न होने का खुलासा हुआ। खुलासा होने पर सीएनडीसी ने इस कंपनी पर घपलेबाजी का मुकदमा बरेली के एक थाने में दर्ज करा दिया, तब से यह कार्य रुका पड़ा है। अधिकारियों का कहना है कि मुकदमा के निर्णय के बाद ही प्लांट को चलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।        

आखिर कब सुलझेगी गुत्थी      
शहर वासियों का कहना है कि कई वर्षों से प्लांट बनाए जाने की कवायद चल रही थी, लेकिन अभी तक चालू नहीं हो सका। आखिर कब तक नागरिकों को गंदगी से निजात मिल पाएगी। कंपनी और कार्यदायी संस्था में विवाद चल रहा है, तो इसमें जनता की क्या कमी है, जो वर्षों से गंदगी की बीच जिंदगी बसर कर रहे हैं।
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गल रहे 42 लाख के उपकरण      
 12 करोड़ की लागत के इस प्रोजेक्ट में पांच करोड़ 42 लाख रुपये खर्च कर मशीनें और उपकरण लगाए गए हैं, जो कई वर्षों से जंक से गले जा रहे हैं। ऐसे में कुछ सामाजिक लोगों का कहना है कि अब फिर मशीनों या उपकरणों की व्यवस्था कराने के लिए 12 करोड़ की आवश्कता होगी। लोगों का अनुमान है अगर मरम्मत भी कराई जाएगी, तो करीब सात-आठ लाख रुपये फिर खर्चे में आ जाएंगे। इस प्रकार आठ और साढ़े छह करोड़ को मिला कर करीब 15 करोड़ रुपये का बजट तैयार हो रहा है। ऐसे में तीन करोड़ रुपये की अतिरक्ति जरूरत पड़ सकती है।

 वित्तमंत्री को रिपोर्ट देंगे भाजपा जिलाध्यक्ष
    बीते दिनों भाजपा की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में आए प्रदेश सरकार में वित्तमंत्री राजेश अग्रवाल ने भाजपा जिलाध्यक्ष को बजट के लिए प्लांट का ब्यौरा मांगा था। जिलाध्यक्ष हरीश शाक्य ने कहा कि वित्तमंत्री को ब्यौरा दे दिया जाएगा,लेकिन प्लांट को लेकर मामला कोर्ट में चल रहा है। 
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प्लांट के लिए कितनी जमीन और कितना बजट        
 उतरना और सैयपुरा गांव में-- 12 हेक्टेयर जमीन चयनित है।        
 प्रोजेक्ट की कीमत--12 करोड़ रुपये        
 खर्च की गई रकम ---- पांच करोड़ 42 लाख        

    
 ए टू जेड कंपनी और सीएनडीएस कंपनी में विवाद की वजह से मामला लंबित है। इसका निर्णय होने के बाद आगे की कारवाई की जाएगी।
- अजय कुमार श्रीवास्तव, एडीएम प्रशासन
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